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राम मंदिर नहीं बनवा सकते तो हिंदू वोटों की उम्मीद छोड़ दें

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बरेली। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण में देरी पर भाजपा के साथ विपक्षी दलों के सांसदों को भी चेतावनी दी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हिंदू वोटों के बल पर संसद की सीढ़ियां चढ़ने वाले सांसद अब बहुसंख्यक समाज के धैर्य की परीक्षा लेना छोड़ दें। अगर वे दोबारा सांसद बनना चाहते हैं तो अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण करने के लिए संसद में सरकार पर दबाव बनाकर कानून बनवाएं। जो सांसद राम मंदिर निर्माण के बिल का विरोध करेगा, हिंदू समाज उसका लोकसभा चुनाव में पूरी तरह बहिष्कार करेगा।
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मनोहर भूषण इंटर कालेज मैदान में रविवार को आयोजित ‘विराट हिंदू शंखनाद’ सभा में उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के तीन रास्ते हैं। पहला बातचीत का था जो विफल हो चुका है। दूसरे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से यह मसला हल हो सकता था, लेकिन उसमें भी तारीख पर तारीख मिल रही है। तीसरा और अंतिम विकल्प संसद में कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण करने का है। वैसे विहिप भगवान राम का मंदिर और भी तरीके से बना सकती है, लेकिन सोमनाथ मंदिर संसद में कानून बनाने का प्रयोग सबके सामने हैं। यह अभियान उसी के लिए चलाया जा रहा है।

साढ़े चार साल से चुप क्यों मोदी सरकार
विजय शंकर तिवारी ने दावा किया कि केंद्र सरकार श्रीराम जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण जरूर कराएगी, ऐसा उनका विश्वास है। लेकिन वह साढ़े चार साल तक इस मसले पर चुप रही, इस पर हैरत भी है। विहिप नेता ने कहा कि किसी भी आंदोलन को खड़ा करने में 10 साल लगते हैं। श्रीराम मंदिर निर्माण आंदोलन की अभी शुरूआत भर है। राजनीतिक दल यह समझ लें कि अबकी यह आंदोलन 1992 से भी बड़ा होगा क्योंकि श्री राम मंदिर केवल हिंदुओं की आस्था नहीं बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रश्न है। जो राजनीतिक दल यह कह रहे हैं कि क्या राम मंदिर बनाने से रोटी, रोजगार मिलेगा तो वह समझ लें कि रोटी खाकर केवल पशु गुजारा करते हैं। इंसान केवल रोटी के लिए नहीं बल्कि स्वाभिमान के लिए जीता है। जब संसद तीन तलाक पर कानून बना सकती है तो अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण पर क्यों नहीं। संसद में कानून बनाने के लिए विहिप नेताओं ने भारत सेवा ट्रस्ट पर रैली के रूप में पहुंचकर केंद्रीय श्रम मंत्री एवं सांसद संतोष गंगवार को ज्ञापन भी सौंपा।
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1528 से पहले राम मंदिर होने के सबूत
विहिप प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकरदयाल शर्मा ने पूछा था कि 1528 से पहले अयोध्या में क्या था तो सरकार ने उसका उत्तर नहीं दिया। जब पुरातत्व विभाग ने उस जगह की खुदाई की तो मंदिर होने के सबूत मिले। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल से उन्होंने पूछा कि वह बताएं कि जब आतंकी की पैरवी में कोर्ट रात में खुल सकता है तो वह श्री राम मंदिर पर सुनवाई 2019 के बाद क्यों चाहते हैं। रैली को डा. महेंद्र सिंह बासू, राकेश अग्रवाल, राकेश त्यागी आदि ने भी संबोधित किया। प्रारंभ श्री राम और सीता के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

धर्माचार्य भी शामिल हुए
सिविल लाइंस गुरुद्वारे के ज्ञानी काले सिंह, आचार्य संजीव गौड़, दुर्गानंद ब्रह्मचारी, शैलेंद्रानंद महाराज, मलयानंद महाराज समेत त्रिवटीनाथ, अलखनाथ मंदिरों समेत नाथ नगरी के अन्य शिवालयों के धर्माचार्य और साधु संत भी रैली में शामिल हुए।

भाजपा-आरएसएस पदाधिकारी भी पहुंचे
विहिप की रैली में मेयर उमेश गौतम, विधायक डा. अरुण कुमार, डा. डीसी वर्मा, बहोरनलाल मौर्य, छत्रपाल गंगवार, भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र राठौर, पवन अरोड़ा, संजीव अग्रवाल, अजय गुप्ता, डा. विनोद पागरानी, धर्मेंद्र गुप्ता, रामगोपाल मिश्रा, फरहत नकवी, सुरेश जी, डा. केएम अरोड़ा, आदेश प्रताप सिंह, संजीव शर्मा आदि।
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