यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन ने सरकार के देना बैंक, विजय बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के विलय के फैसले का विरोध किया है।
सरकार के इस आदेश को लेकर फोरम की मीटिंग अध्यक्ष सुनील मित्तल की अध्यक्षता में हुई, जिसमें जिला संयोजक दिनेश सक्सेना ने कहा कि बैंकों का आपसी विलय समस्या का हल नहीं। सरकार के इस फैसले का सभी बैंक कर्मचारी और अधिकारी विरोध करते हैं।
उधर, यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के सहायक महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि सरकार की मंशा विलय के नाम पर कर्मचारियों की संख्या में कटौती करना है। सार्वजनिक बैंक आर्थिक जगत की रीढ़ है। विलय की बात देश के साथ धोखा है। अधिकारी संघ के जोनल सेक्रेटरी ओपी बढ़ेरा ने कहा कि सरकार पेटीएम और प्राइवेट बैंक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बैंकों का विलय करना चाहती है, जो जनहित में नहीं। इस मौके पर अरविंद रस्तोगी, पीके माहेश्वरी, रवि आनंद, पीपी सिंह, नरेश टंडन, अजीत किशोर सक्सेना, अरुण कुमार, चरन सिंह यादव, कुशल गर्ग, रंजन मोहले सहित कई बैंक कर्मचारी नेताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।