राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर भारांक का लाभ लेने वालों की अब दाल नहीं गलेगी। एनएसएस के सर्टिफिकेट अब ऑनलाइन जारी होंगे। इतना ही नहीं एनएसएस यूनिट के हर विद्यार्थी का रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा, इसे कभी भी सत्यापित किया जा सकेगा। नई व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।
दरअसल, अब तक एनएसएस के सर्टिफिकेट ऑफलाइन बनते हैं। कैंप में हिस्सा न लेने वालों को भी सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा एडमिशन प्रक्रिया में होता है। भारांक का लाभ पाने के लिए छात्र किसी दूसरे के सर्टिफिकेट स्कैन करके उसे अपने नाम से तैयार कर लेते हैं। बरेली कॉलेज के पास एक प्रिंटिंग प्रेस में तो बड़े पैमाने पर यह खेल होता था। बरेली कॉलेज में इसी साल सैकड़ों सर्टिफिकेट निरस्त किए गए थे। अब ऑनलाइन सर्टिफिकेट जारी होने से फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा। कंप्यूटर से इनका सत्यापन भी किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय से संबद्ध दो सौ से ज्यादा महाविद्यालयों में एनएसएस यूनिट हैं।
फर्जीवाड़े के चलते इस बार 22 यूनिट की गईं थीं रद्द
एनएसएस में कॉलेज स्तर पर किस हद तक फर्जीवाड़ा होता है, इसका नमूना इसी साल देखने को मिला। 22 कॉलेजों ने कागजों पर फर्जी कैंप दिखा दिए गए। कैंप का बजट भी कॉलेज डकार गए। मामला खुला तो विश्वविद्यालय ने इन सभी 22 यूनिट को रद्द कर दिया। अब कैंपों को लेकर भी सख्ती बरती जा रही है। जहां कैंप लगेगा, उसका भौतिक सत्यापन भी होगा।
राष्ट्रीय सेवा योजना के सर्टिफिकेट इस साल से ऑनलाइन होने जा रहे हैं। विद्यार्थियों का सारा डाटा ऑनलाइन रहेगा। इनका सत्यापन भी ऑनलाइन किया जा सकेगा। इससे सर्टिफिकेट में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकेगी। - डॉ. सोमपाल सिंह, एनएसएस कोआर्डिनेटर रुविवि