फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार या ‘प्यार का इजहार’

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग सरकार के उन ‘दुर्लभ’ विभागों में से एक है जहां हर साल अरबों रुपये फूंकने के बाद भी इस बात का कोई आकलन नहीं किया जाता कि इसके बदले में उन गरीब बच्चों को मिला क्या जिन्हें उनके मां-बाप ने बड़ी हसरतों से स्कूल में पढ़ने भेजा था। सबसे ज्यादा मनमानी और गड़बड़-घोटालों वाले इस विभाग पर जनप्रतिनिधियों की तवज्जों सिर्फ ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने भर पर रहती है तो अफसरों की निगाह यहां आने वाले बजट पर। अफसरों की इच्छाएं पूरी करते-करते शिक्षक भी यह मान बैठे हैं कि बच्चों को पढ़ाना उनका मूल दायित्व नहीं है। स्कूलों में शिक्षा का माहौल ही नहीं है तो वहां दूसरे काम हो रहे हैं। कभी अफसरों की हरकतों से यह महकमा शर्मसार होता है तो कभी शिक्षकों की हरकतों से।
विज्ञापन

 

124 शिक्षकों को दी जा रही ट्रेनिंग के नाम पर हो रहा खिलवाड़

बरेली। वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है और दूसरे विभागों की तरह ही बेसिक शिक्षा विभाग भी बजट ठिकाने लगाने में जुटा है। शैक्षिक गुणवत्ता स्तर सुधारने के नाम पर चल रही ट्रेनिंग के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। न शिक्षक इस ट्रेनिंग को लेकर गंभीर हैं और न विभागीय अफसर। 52 लाख रुपये खर्च करके 5124 शिक्षकों के लिए आयोजित ट्रेनिंग का मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया। टीम ब्लॉक संसाधन केंद्र क्यारा में पहुंची तो हकीकत बहुत कड़वी नजर आई। ट्रेनिंग में आया कोई शिक्षक ‘प्यार का इजहार’ करता मिला तो कोई फोन पर टहलते हुए बातें करता नजर आया।

शिक्षकों के खाने-पीने का पैसा अफसर कर रहे हजम
पांच दिन की इस ट्रेनिंग में प्रतिदिन प्रति शिक्षक दो सौ रुपये यानी कि पूरी ट्रेनिंग में एक शिक्षक पर एक हजार रुपये खर्च करने हैं। शिक्षकों ने बताया कि इसमें भारी गोलमाल हो रहा है, प्रतिदिन एक शिक्षक पर बमुश्किल सौ-सवा रुपये ही खर्च हो रहे हैं। ट्रेनिंग के नाम पर एक रजिस्टर, चार्ट, पेन एवं कुछ सामान है जो 30-40 रुपये का है। खाना जमीन पर बैठाकर थर्मोकोल की थाली में दिया जा रहा है, जिसकी गुणवत्ता कुछ खास नहीं है। बाकी चाय और नाश्ता। यही पूरे दो सौ रुपये का हिसाब है।
विज्ञापन


ट्रेनिंग के नाम पर गप्पबाजी और हुल्लड़
अमर उजाला की टीम दो ट्रेनिंग रूम में गई। यहां शिक्षक अलग-अलग गुटों में बैठे नजर आए। अधिकांश अपने आप में व्यस्त थे। हंसी-मजाक के साथ ही एक शिक्षक तो लेटकर शिक्षिका से ऐसे बातें कर रहे थे, जैसे कि ‘प्यार का इजहार’ चल रहा हो। मगर ट्रेनिंग देने वालों को इससे कोई मतलब नहीं था।

शिक्षक की कुर्सी पर बच्चा
यह कार्यशाला इंग्लिश मीडियम स्कूल कांधरपुर के प्रांगण में चल रही थी। एक कक्षा में बच्चा शिक्षक की कुर्सी पर बैठा नजर आया तो दूसरी कक्षा में बच्चा ही ब्लैकबार्ड पर पढ़ा रहा था। दोनों ही कक्षाओं में शिक्षक नदारद थे।

ट्रेनिंग ठीक तरह चल रही है। पांच दिन की ट्रेनिंग हैं जिसके शैक्षिक गुणवत्ता सुधार को लेकर विभिन्न माध्यमों से चर्चा की जा रही है। प्रत्येक शिक्षक के लिए प्रतिदिन दो सौ रुपये का बजट है, जिसमें चाय-नाश्ता, खाना, स्टेशनरी, टेंट आदि की व्यवस्था की गई है। - योगेश पाठक, एबीआरसी क्यारा

साल भर काम का नाम.. परीक्षाओं से पहले याद आया व्यायाम
बरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में सत्र खत्म होने वाला है और 16 मार्च से वार्षिक परीक्षाएं शुरू होनी हैं। मगर यहां के जिम्मेदारों को अब व्यायाम की याद आई है। हालांकि यह याद ऐसे ही नहीं आई, इसके पीछे एक करोड़ 84 लाख 30 हजार रुपये के भारीभरकम बजट का रोल है।। इस बजट से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में खेल सामग्री खरीदी जानी है। अगर मार्च खत्म होने तक यह बजट खर्च नहीं हुआ तो शासन को वापस चला जाएगा। इसके लिए आनन-फानन में व्यायाम शिक्षक भी नियुक्त कर दिए हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में जिले भर 2098 प्राथमिक एवं 794 उच्च प्राथमिक स्कूलों में खेल सामग्री क्रय करने के लिए बजट जारी किया गया है। इसमें प्राथमिक स्कूल पांच हजार और उच्च प्राथमिक स्कूल दस हजार रुपये से स्पोर्ट्स किट खरीदेंगे। यह बजट अभी कुछ ही दिन पहले आया है क्योंकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक खर्च नहीं किया तो रुपये लैप्स हो जाएंगे। शिक्षक नेता विनोद कुमार शर्मा का कहना है कि परीक्षा शुरू होने से पहले खेलकूद के लिए बजट जारी करना बच्चों की चिंता नहीं, बजट खपाने की चिंता है।

इन्हें बनाया व्यायाम शिक्षक
बीएसए तनुजा त्रिपाठी ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय सुंदरी भदपुरा के सहायक अध्यापक मुकेश कुमार को जिला व्यायाम शिक्षक बनाया है। इसके अलावा नवाबगंज में श्रीहंस कुमार, फतेहगंज पश्चिमी में अमित कुमार, भदपुरा में पवन कुमार, मीरगंज में बलवीर सिंह, मझगवां में रूपेंद्र सिंह, बिथरी चैनपुर में अविनाश चंद्र सागर, फरीदपुर में विजय बहादुर गौड़, शेरगढ़ में राजीव सिंह, क्यारा में महावीर प्रसाद, भोजीपुरा में ममता सेठ, दमखोदा में प्रीति शर्मा, आलमपुर जाफराबाद में अरुण कुमार पांडेय, बहेड़ी में राजवीर सिंह, भुता में संतोष सिंह और नगर क्षेत्र में श्रीमती सक्सेना को ब्लॉक व्यायाम शिक्षक बनाया गया है। पूरा सत्र लगभग बीतने वाला है और इन शिक्षकों को व्यायाम शिक्षक अब बनाया गया है। इस संबंध में बीएसए तनुजा त्रिपाठी को फोन किया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें