बरेली। मानव तस्करी के शक में मदरसों के 113 बच्चों को ट्रेन से उतारकर छानबीन करना तो ठीक था, लेकिन जीआरपी और आरपीएफ वालों ने अपनी लंबी जांच के दौरान उनके साथ जरा भी संवेदना से काम नहीं लिया। पुलिस की घेराबंदी के बीच करीब चार घंटे तक घबराए बच्चे भूखे-प्यासे प्लेटफार्म पर बैठे रहे। भीषण गर्मी से परेशान कुछ बच्चों ने पानी पीने के लिए उठने की कोशिश की तो उन्हें पुलिस वालों ने डांटकर बैठा दिया। बच्चों को प्यास बर्दाश्त नहीं हुई तो वह रोने लगे। हालांकि जीआरपी वाले इसके बाद भी नहीं पसीजे।
मालदा टाउन एक्सप्रेस से उतारे गए ये बच्चे छह से 16 साल की उम्र तक के थे। ट्रेन से उतरने के बाद प्लेटफार्म पर उन्होंने पुलिस का लावलश्कर देखा तो बुरी तरह घबरा गए। सभी बच्चों को इकट्ठा कर थाना जीआरपी के सामने ले जाया गया और फिर वहीं प्लेटफार्म पर बैठाकर चारों ओर सिपाही तैनात कर दिए गए। गर्मी से परेशान ये बच्चे कुछ देर तक तो शांत और सहमे हुए बैठे रहे, लेकिन फिर कुछ बच्चों ने पानी पीने के लिए उठने की कोशिश की तो सिपाहियों ने उन्हें डांटकर अपनी जगह बैठा दिया। इससे ये बच्चे और ज्यादा सहम गए और फिर उन्होंने अपनी जगह से हिलने तक की कोशिश नहीं की। इसी बीच जमायत उलमा शहर बरेली के जनरल सेकेट्री तारिक कासमी और मुफ्ती असजद कासमी को जब जंक्शन पर मदरसों के बच्चों को उतारने के बारे में जानकारी मिली तो दोनों ने आरपीएफ इंस्पेक्टर बलवीर सिंह तोमर से बातचीत की और उन्हें असलियत से अवगत कराया। फिर उनके दूसरी ट्रेन से रवाना होने तक वहीं रुके रहे।
ट्रेन से उतारे गए ये बच्चे मुरादाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ, गाजियाबाद के मदरसों के थे। कुछ बच्चे इनमें ऐसे थे जो पहली बार मदरसे जा रहे थे। इंस्पेक्टर आए तो उन्होंने पुलिस घेराबंदी के बीच सहमे बैठे बच्चों की परेशानी पर ध्यान नहीं दिया बल्कि उन्हें घेरे खड़े जवानों को शाबासी देने लगे। साढ़े पांच बजे जंक्शन पर बरेली दिल्ली पैसेंजर और पौने छह बजे कोलकाता जम्मूतवी सियालदह एक्सप्रेस पहुंची तो बच्चों को भेड़ बकरी की तरह कोच में ठूस दिया गया। ज्यादातर बच्चे ऐसे भी थे, जिनके घर वालों ने रिजर्वेशन भी कराया था, लेकिन बरेली से उन्हें साधारण कोच में आगे जाना पड़ा।
सौ से ज्यादा बच्चे ट्रेन से उतारे तो फैली सनसनी
आरपीएफ कमांडेंट के इनपुट पर इंस्पेक्टर बलवीर सिंह तोमर ने जीआरपी इंस्पेक्टर कृष्ण अवतार से बात कर पहले तो फोर्स को अलर्ट किया फिर दोपहर सवा दो बजे करीब ट्रेन प्लेटफार्म पर आते ही उसे घेरकर सर्च शुरू करा दी। पूरा कोच मुस्लिम बच्चों से भरा मिला जिन्हें प्लेटफार्म नंबर एक पर उतारकर ट्रेन आगे रवाना करा दी गई। बड़ी संख्या में बच्चे प्लेटफार्म पर उतरे तो गहमागहमी हो गई। जीआरपी के मुताबिक पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे ईद की छुट्टी पर घर गए थे। अब मदरसों के लिए लौट रहे थे। संयुक्त टीम ने इनके नाम पतों की तस्दीक कराई। बच्चों के परिवारवालों का नंबर लेकर उनसे भी बात की गई। छात्रों के बयानों की वीडियो रिकार्डिंग की गई। संतुष्ट होने के बाद इन्हें दिल्ली-बरेली पेसेंजर और सियालदाह एक्सप्रेस से दिल्ली दिशा में भेज दिया गया।
त्रिवेणी में पंखे नहीं चले.. गरीबरथ में पानी नहीं
बरेली। जंक्शन पर शनिवार को त्रिवेणी एक्सप्रेस के यात्रियों ने पंखे न चलने की बात कहते हुए स्टेशन मास्टर के दफ्तर में हंगामा किया तो गरीबरथ रथ के यात्री इसलिए परेशान थे कि कोच में पानी नहीं आ रहा था। हालांकि दोनों ही शिकायतों में यात्रियों को आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
दोपहर पौने बारह बजे टनकपुर सिंगरौली त्रिवेणी एक्सप्रेस जंक्शन पर पहुंची। ट्रेन के रुकते ही कोचों से उतरकर यात्री स्टेशन मास्टर आफिस पहुंच गए और हंगामा करने लगे। उनका कहना था कि ट्रेन में पंखे न चलने से बैठना मुश्किल है। टनकपुर से सिटी स्टेशन तक सभी स्टेशनों पर शिकायत की लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि ट्रेन रुकते ही पंखे भी रुक जाते हैं। जंक्शन के ट्रेन लाइटिंग स्टाफ ने चेक किया तो पता चला कि टनकपुर में बैटरियां चार्ज नहीं हुई हैं। सूत्रों के अनुसार टनकपुर यार्ड छोटा होने से सभी कोचों की बैटरी चार्ज नहीं हो पाती है। ट्रेन रवानगी के बाद मामला शांत हुआ ही था कि साढ़े तीन फिर हंगामा हो गया। अमृतसर से सहरसा जाने वाली गरीब रथ एक्सप्रेस पहुंची तो कोचों में पानी न होने से परेशान यात्री स्टेशन अधीक्षक सत्यवीर सिंह के पास पहुंच गए। उनका कहना था कि हर स्टेशन पर पानी के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है। बाद में दो मिनट रुकने के बाद ट्रेन चली तो यात्रियों ने चेन पुलिंग कर दी। ट्रेन करीब कुछ देर प्लेटफार्म पर खड़ी रही। इस दौरान स्टाफ ने कुछ कोचों में पानी भरा।