बरेली। बरेली में अवैध मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनवाकर गए बीडीए के एक जुगाड़बाज एक्सईएन पर जब जांच का शिकंजा कसा तो उसने पहले तो जांच रिपोर्ट को डंप करा दिया और शासन ने जब दोबारा जांच रिपोर्ट मांगी तो उसमें खुद को मृत दिखा दिया। शासन ने गोपनीय सूचना के आधार पर दोबारा जांच कराई तो पता चला कि एक्सईएन रिटायर हो चुका है लेकिन न सिर्फ जीवित है बल्कि कानपुर में रहते हुए सरकार से पेंशन भी ले रहा है। अब शासन ने एक्सईएन और अवैध निर्माण कराने में उसके सहयोगी जेई के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। जेई एक दूसरे मामले में सस्पेंड भी हो चुका है।
खुर्रम गौंटिया में वर्ष 2010 में बीडीए से बगैर नक्शा मंजूर कराए तत्कालीन जेई राजीव कुमार सिंह राठौर और एक्सईएन डीपी मिश्रा ने मल्टीस्टोरी बिल्डिंग का निर्माण करा दिया था। अब राज्यपाल ने इस मामले में दोनों के विरुद्ध मुकदमा चलाने की विधिक स्वीकृति प्रदान की है। राज्यपाल की ओर से प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश के मुताबिक चार जून 2010 को खुर्रम गौंटिया में बीडीए से बिना नक्शा मंजूर कराए बनाई गई मल्टीस्टोरी बिल्डिंग का तत्कालीन जेई राजीव कुमार सिंह राठौर और एक्सईएन डीपी मिश्रा ने उच्चाधिकारियों के आदेश के बावजूद चालान नहीं किया। शासन ने इसे भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के तहत गंभीर अपराध माना। प्रमुख सचिव ने इस अपराध के लिए जेई राजीव कुमार सिंह और एक्सईएन डीपी मिश्रा पर धारा 467, 468, 471 और 120 बी, भारतीय दंड विधान की धारा 13 (1) डी और सहपठित धारा 13 (2) के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
आरोपी जेई और एक्सईएन दोनों अब बीडीए में तैनात नहीं है। एक्सईएन डीपी मिश्रा रिटायर हो चुके हैं। हालांकि शासन को सौंपी गई पहली रिपोर्ट में बता दिया गया था कि एक्सईएन डीपी मिश्रा की मौत हो चुकी है। बाद में दोबारा जांच कराई गई तो पता चला कि आरोपी एक्सईएन जिंदा हैं और इस समय कानपुर के ट्रांसपोर्ट नगर में ब्लॉक बगाही के पास मकान नंबर 130/ 90/5 एल-1 रह रहा है। राज्यपाल की ओर से जेई और एक्सईएन दोनों पर भ्रष्टाचार अधिनियम, धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाने की विधिक अनुमति दी गई है।
तब बीडीए स्टाफ ने सिविल लाइंस में कराए थे दर्जनों अवैध निर्माण
बरेली। खुर्रम गौंटिया में अवैध मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनवाने पर कार्रवाई के शिकार हुए जेई और एक्सईएन ने सिर्फ खुर्रम गौंटिया नहीं बल्कि सिविल लाइंस इलाके में भी बड़ी संख्या में अवैध कामर्शियल और रेजिडेंसियल भवनों के निर्माण कराए थे। हद यह थी कि खुद तत्कालीन बीडीए उपाध्यक्ष भी रेलवे जंक्शन पर एक चर्चित होटल में रहते थे। इसी दौरान वह होटल की दो मंजिल इमारत का स्वीकृत नक्शे को ताक पर रखकर निर्माण करा गए। इसमें बीडीए के इसी जेई की भी भूमिका थी। इसी रोड पर एक और होटल (ग्रांट) भी स्वीकृत नक्शे के उलट बना है जो इसी जेई ने बनवाया था। डीएम आवास के सामने भी एक कामर्शियल बिल्डिंग भी अवैध रूप से बनवाई गई। चौकी चौराहे से लाल फाटक रोड पर एक ज्वेलरी शोरूम की बिल्डिंग के अलावा आयकर विभाग के बगल में होटल की बिल्डिंग भी बीडीए से नक्शा मंजूर कराए बगैर बनवाई गई। इनके अलावा अन्य दर्जनों अवैध बिल्डिंग का निर्माण स्वीकृत नक्शे के उलट या बगैर नक्शा स्वीकृत कराए ही करा दिए गए।
यह 2010 का मामला है। उस समय खुर्रम गौंटिया में अवैध तरीके से कोई मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन रही थी। जेई ने उस बिल्डिंग का चालान नहीं किया था। शासन ने इस संबंध में हमसे रिपोर्ट मांगी थी जो भेज दी गई। शासन ने उसी रिपोर्ट पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। - दिव्या मित्तल, उपाध्यक्ष बीडीए