बरेली। आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. बीपी मिश्रा ने कहा कि मीट उद्योग की गुणवत्ता तथा तकनीकी में पिछले कुछ सालों में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन इसमें अभी और सुधार की जरूरत है। इसके बाद से ही यह सफल व्यवसाय का रूप ले सकेगा। उन्होंने कहा कि कुक्कुट उद्योग इसलिए सफल हो पाया क्योंकि इसे आधुनिक तकनीकों तथा निजी क्षेत्रों को जोड़ा गया, जिससे यह आज एक व्यवसाय का रूप ले चुका है।
वह इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) एग्री-बिजनेस इंक्युबेशन (एबीआई) केंद्र तथा पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी के संयुक्त तत्वावधान में मांस प्रसंस्करण से उद्यमिता विकास पर आयोजित छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहले दिन बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
जैविक उत्पाद विभाग के विभागाध्यक्ष तथा एग्री-बिजनेस इंक्युबेशन परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. आरपी सिंह ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य स्वच्छ मांस उत्पादन एवं प्रसंस्करण के द्वारा उद्यमिता विकास व इस क्षेत्र में कौशल विकास है। पशुधन उत्पादन प्रौद्योगिकी के विभागाध्यक्ष डा. एसके मेंदीरत्ता ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मांस उत्पादन से जुड़ी जानकारी प्रदान की जाएगी, जिनमें पशुओं का चयन, मांस प्रसंस्करण और पैकेजिंग द्वारा स्वच्छ मांस, पारंपरिक मास उत्पादों के लिए मांस प्रसंस्करण, इमल्शन, एनरोबड, पुनर्गठित, उपचारित मांस, भुना हुआ मांस, शैफ स्टेबल उत्पाद तथा मांस पैकेजिंग, विपणन, गुणवत्ता, मूल्यांकन, सूक्ष्म जीव विज्ञान आदि से जुड़ी जानकारी प्रदान की जाएगी, साथ ही प्रशिक्षण के दौरान भेड़ बकरी, कुक्कुट और शूकर फार्म तथा आधुनिक वधशाला का भ्रमण भी कराया जाएगा। आभार सह पशु पुनरूत्पादन विभाग के डॉ. एसके सिंह ने किया। इस दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजीव रंजन, डॉ. सुमन तालुकदार भी मौजूद थे। प्रशिक्षण में दिल्ली, मेरठ तथा बरेली के छह प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं।