बरेली। इलाज में टालमटोल से पांच दिन की बच्ची की मौत पर मुस्कराने वाले सीएमएस डॉ. गुप्ता बरेली नहीं छोड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने शासन को भी गुमराह करने की कोशिश की थी। निलंबन के कुछ दिन पहले शासन ने जिले में तैनात डॉक्टरों के कार्यकाल की जानकारी मांगी गई थी। एडी हेल्थ को सूची मुहैया कराई गई, उसमें डॉ. गुप्ता अपना नाम छिपा गए थे। निदेशक की आपत्ति के बाद एडी हेल्थ को अपनी हैंड राइटिंग में डॉ. गुप्ता का नाम बढ़ाना पड़ा था।
मौजूदा समय में स्वास्थ्य विभाग की ट्रांसफर नीति के मुताबिक एक चिकित्सक एक जिले में अधिकतम सात साल और मंडल में 10 साल रह सकता है। हालांकि इस शासनादेश में इसका भी प्रावधान है कि इस स्थानांतरण में फंसने वाले डाक्टरों में से 30 फीसदी डाक्टरों के ही तबादले किए जा सकेंगे। हाल ही में निलंबित किए गए सीएमएस डा. केएस गुप्ता मंडल में 1992 से डटे हैं। बरेली जिले की बात करें तो डा. गुप्ता 2012 से तैनात है। इस तरह डा. गुप्ता को पिछले करीब सात साल से जिले में और करीब 26 साल से मंडल में जमे रहे। उनके निलंबन से पहले शासन ने एडी (हेल्थ) के माध्यम से मंडल के सभी जिलों में तैनात चिकित्सकों और चिकित्साधिकारियों की तैनाती का ब्योरा मांगा था। ताकि लंबे समय से जमे चिकित्सकों का स्थानांतरण किया जा सके। सीएमएस दफ्तर से जो सूची सीएमओ कार्यालय को दी गई, डॉ. गुप्ता उसमें अपना नाम छिपा गए। एडी हेल्थ जब सीएमओ कार्यालय के माध्यम से मिली सूची को लेकर डायरेक्टर आफिस पहुंची तो डायरेक्टर ने इस पर आपत्ति जताई कि सूची में डॉ. गुप्ता का नाम क्यों नहीं है। तब एडी हेल्थ ने डा. गुप्ता की डिटेल ली और यहां से भेजी गई कंप्यूटराइज्ड सूची में सबसे नीचे अपनी हैंड राइटिंग में डा. केएस गुप्ता का कार्यकाल लिख दिया। इसकी पुष्टि एडी (हेल्थ) ने भी की। सूत्र बताते हैं कि जब भी डा. गुप्ता ट्रांसफर नीति में फंसते तो कभी राजनीतिक रसूख का लाभ उठाकर बच जाते तो कभी दूसरे तरीकों से।
‘डॉक्टरों के कार्यकाल के संबंध में सीएमएस दफ्तर से सीएमओ कार्यालय भेजी गई सूची में तत्कालीन सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता का नाम नहीं था। जब डायरेक्टर ने इस ओर ध्यान दिलाया तो अपनी हैंडराइटिंग में डॉ. गुप्ता का नाम बढ़ाना पड़ा था।’
प्रमिला गौड़, एडी हेल्थ