बरेली। गरीब सवर्णों के एडमिशन के लिए देरी से आदेश जारी होने के कारण महाविद्यालय असमंजस की स्थिति में हैं। विश्वविद्यालय ने गरीब सवर्णों के लिए आवेदन तो मांगे हैं लेकिन संख्या बहुत कम है। इन बढ़ी सीटों पर किसी अन्य आवेदक को एडमिशन नहीं दिया जा सकते। जिस कारण तमाम सीटें खाली रह जाने का अनुमान जताया जा रहा है।
शासन के निर्देश पर रुहेलखंड विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध 500 से अधिक महाविद्यालयों में गरीब सवर्णों का आरक्षण लागू कर सीटों में दस प्रतिशत बढ़ोत्तरी की गई है। इसके चलते इन महाविद्यालयों में 25 हजार से अधिक सीटें बढ़ गई हैं। महाविद्यालयों को इस कोटे के तहत एडमिशन के लिए 20 जून को आदेश जारी किया गया है। हालांकि, विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान ही फार्म में इसका विकल्प मुहैया कराया था, मगर विश्वविद्यालयों ने ध्यान नहीं दिया। जागरूकता का अभाव होने के चलते इस आरक्षण का लाभ पाने अभ्यर्थी भी कम ही नजर आ रहे हैं। ऐसे में सीटें खाली रहने का अंदेशा हो गया है।
पोस्ट ग्रेजुएशन में सवर्ण आरक्षण के आवेदन
बीएलएड में 89, एमएससी बॉटनी में 10, बीपीएड में तीन, एमएससी कैमिस्ट्री में 69, एमएससी पर्यावरण विज्ञान में एक, इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री में एक, एलएलएम में 37, एमएससी गणित में 24, एमएड में 37, माइक्रोबॉयोलॉजी में दो, एमफिल में छह, एमएससी फिजिक्स में 48 और एमएससी जूलॉजी में 33 आवेदन आए हैं।
बरेली कॉलेज अलग से करेगा प्रक्रिया
एडमिशन के लिए बरेली कॉलेज ऑनलाइन पंजीकरण कराता है। मगर गरीब सवर्णों के आरक्षण के तहत एडमिशन के लिए कोई ऑनलाइन व्यवस्था नहीं की गई। बरेली कॉलेज के मुख्य समन्वयक डॉ. अनुराग मोहन ने बताया कि इसके लिए बाद में अलग से आवेदन लिए जाएंगे।