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महिलाओं को भी पुरुषों की तरह मिलें क्रिकेट में सुविधाएं

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बरेली। रणजी महिला खिलाड़ी एवं दिल्ली यूनिवर्सिटी महिला क्रिकेट टीम की कप्तान नेहा छिल्लर को मलाल है कि क्रिकेट में महिला टीम को उतनी तरजीह सरकार नहीं देती जितना पुरुष खिलाड़ियों को देती है। उसका मानना है कि यदि सरकार नौकरी व खेलने की फीस में पुरुषों की तरह ही महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को भी तरजीह दे तो महिला टीम भी देश का नाम रोशन करने में पुरुष टीम से पीछे नहीं रहेगी।
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यहां एक कॉलेज में चल रही महिला क्रिकेट प्रतियोगिता में दिल्ली की टीम के साथ पहुंची नेहा ने बताया कि भाई अंकित छिल्लर को क्रिकेट खेलता देख उन्हें भी क्रिकेट का शौक हुआ। थोड़े बहुत अभ्यास से 10 साल की उम्र में उन्हें अंडर-16, 11 साल की उम्र में अंडर-19 की राज्य टीम से खेलने का मौका मिला। आल राउंडर नेहा ने बताया कि 14 साल की उम्र से वह रणजी खेलती आ रही हैं। सात बार रणजी खेल चुकी हैं। मौजूदा समय में वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की महिला क्रिकेेट टीम की कप्तान हैं। नेहा इस बात से दुखी नजर आईं कि क्रिकेट में पुरुष खिलाड़ियों की अपेक्षा महिलाओं को तरजीह नहीं मिलती। बोलीं-लड़कों के मैच अधिक होते हैं। लड़कों को घर से भी इस खेल के लिए सपोर्ट मिलता है, लड़कियों को कम मिलता है। लड़कों के लिए 50 ओवर, टेस्ट मैच, टी-20, आईपीएल मैच होते हैं, लेकिन लड़कियों के सिर्फ 50 ओवर के मैच होते हैं। रणजी खेलने वाले लड़कों को जहां 1.50 लाख रुपये मिलते हैं वहीं लड़कियों को मात्र दस हजार प्रति खिलाड़ी ही मिलते हैं। पुरुष क्रिकेटरों को सरकार कई नौकरियों में कोटा देती है, लेकिन महिला क्रिकेटर को सिर्फ रेलवे में ही नाम मात्र का कोटा मिल पाता है। इंडियन टीम से खेलने की ख्वाहिश रखने वाली नेहा ने कहा कि यदि सरकार महिला क्रिकेटरों को भी पुरुष क्रिकेटरों की तरह बढ़ावा दे तो वह दिन दूर नहीं जब अपने देश की लड़कियां भी पुरुष क्रिकेटरों की तरह देश का नाम रोशन करेंगी।
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