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ई-रिक्शा के चार्जिंग का खेल- चोरी की बिजली से चार्ज हो रहे ई-रिक्शा

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बरेली। ईको फ्रेंडली ई-रिक्शा पॉवर कॉरपोरेशन को तगड़ा झटका दे रहे हैं। इसके बावजूद पॉवर कॉपोरेशन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं कर पा रहा है। इसी कारण है कि शहर में चलने वाले ई-रिक्शा हर दिन चोरी की बिजली से चार्ज हो रहे हैं। इसके लिए बकायदा अवैध चार्जिंग स्टैंड भी बनाए गए हैं। इस पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है। अनुमान है कि पॉवर कॉपोरेशन को दो लाख रुपये का रोजाना घाटा हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक अवैध तरीके से चले रहे चार्जिंग स्टैंड में लाइनमैन की मिलीभगत है।
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ई-रिक्शा के एक बार की चार्जिंग में 10 से 15 यूनिट बिजली खपत होती है। आरटीओ दफ्तर में 2700 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। एक ई-रिक्शा में 850 से लेकर 1000 वाट की डीसी मोटर के साथ 12 वोल्ट की चार बैटरी लगी होती है। अनुमान है कि चार्जिंग में 150 एंपियर प्रति घंटे से बिजली खपत होती है और एक दिन में एक ई-रिक्शा को चार्ज करने में औसतन 10 से 15 यूनिट तक बिजली का प्रयोग होना तय है। वर्तमान में जो ई-रिक्शा चल रहे हैं, उनकी बैटरी कहां और किस कनेक्शन से चार्ज हो रही है, इसका पॉवर कॉरपोरेशन के पास कोई जवाब नहीं है। अनुमान है कि जिन लोगों के पास ई-रिक्शा है, वह अपने घरों से बैटरी को चार्ज कर रहे होंगे। इस हिसाब से उनकी खपत महीने भर में 300/400 यूनिट बढ़नी चाहिए। लेकिन कहीं ऐसा नहीं हो रहा। इससे जाहिर है कि अवैध चार्जिंग स्टैंड बिजली की अवैध तरीके से खपत कर रहे हैं। फिर भी इन पर कोई ठोस कार्रवाई न होना अधिकारियों पर सवालिया निशान लगा रहा है।

मोटी कमाई का जरिया बने अवैध स्टैंड
शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा चोरी की बिजली से चार्ज होकर फर्राटा भर रहे हैं। इस खेल के पीछे वाहन स्टैंड संचालकों का हाथ है। जिन्होंने स्टैंड को ई-रिक्शा चार्ज कर मोटी कमाई का एक जरिया बना लिया है। शहर में सुभाषनगर, बदायूं रोड, सैटेलाइट कार बाजार, श्यामगंज से सैटेेलाइट रोड, कसाई टोला, सैलानी, संजय नगर, कोहाड़ापीर सहित अन्य इलाकों में अवैध तरीके से चार्जिंग स्टैंड बने हैं। इन स्टैंड पर ई-रिक्शा खड़े करने के साथ उन्हें चार्ज करने का काम करते हैं।
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पड़ताल में पता चली ‘रात’ की हकीकत
मंगलवार को ‘अमर उजाला’ टीम ने शहर के कई अवैध चार्जिंग स्टैंड की पड़ताल की। सभी चार्जिंग स्टैंड सूने पड़े थे। हालांकि, इसी दौरान एक संचालक से मुलाकात हुई लेकिन उसने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि अधिकारियों के औचक निरीक्षण होने के चलते अब रात में ई-रिक्शा चार्ज किए जाते हैं। प्रत्येक ई-रिक्शा के चार्ज करने पर 60-70 रुपये लिए जाते हैं। बताया कि प्रतिदिन और माह के हिसाब से वाहन चालक या स्वामी से रेट तय किए जाते हैं। वाहन स्वामी को प्रतिदिन चार्ज करने पर कोई अलग सुविधा नहीं दी जाती लेकिन अगर वे मासिक के हिसाब से भुगतान करने को तैयार होते हैं तो अचानक बीमार होने पर ड्राइवर मुहैया करा देते हैं। साथ ही, एक या दो दिन का चार्जिंग शुल्क भी माफ कर देते हैं।
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