बरेली। कोलकाता में चिकित्सक से मारपीट के मामले को लेकर सोमवार को निजी चिकित्सकों की हड़ताल का असर जिला अस्पताल में भी दिखाई दिया। सामान्य दिनों की अपेक्षा करीब दस फीसदी अधिक मरीज पहुंचे, हालांकि चिकित्सक अपनी सीटों पर जमे रहे, लेकिन मरीजों की लंबी लाइन के कारण बुजुर्गों और महिलाओं को खासी दिक्कत हुई। लाइन में लगे लोग जब नंबर आने के इंतजार में थक कर चूर हो गए तो जिसको जहां जगह मिली वहीं बैठ गया। दवा काउंटरों पर भी मरीजों की भीड़ रही।
निजी चिकित्सकों की हड़ताल को लेकर जिला अस्पताल में मरीजों के बढ़ने की संभावना को लेकर अस्पताल प्रशासन ने पहले से तैयारी कर ली थी, लेकिन डॉक्टरों और दवा काउंटरों की संख्या न बढ़ाए जाने से दूरदराज से पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।
जिला अस्पताल की ओपीडी में सुबह समय से सभी डॉक्टर बैठ गए। इसमें एक फिजीशियन, दो नेत्र रोग, तीन दंतरोग, टीबी रोग, जनरल सर्जरी, हड्डी रोग विशेषज्ञ और बच्चों के एक-एक डॉक्टर बैठे। इन सभी चिकित्सकों के कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। ऐसे में मरीजों और उनके तीमारदारों को खासी असुविधा हुई। लाइन में खड़े बिचपरी निवासी 77 वर्षीय रामलाल ने बताया कि वह फिजीशियन को दिखाने सुबह नौ बजे आए। पहले पर्चा बनवाने के लिए काफी देर लाइन में लगना पड़ा। बाद अपनी बारी के इंतजार में चिकित्सक कक्ष के बाहर बरामदे के बाहर तक लगी लाइन में तीन घंटे लगना पड़ा। सिर्फ रामलाल ही नहीं, उनके जैसे कई बुजुर्गों के अलावा कई महिलाएं गोद में बच्चा लिए घंटों लाइन में लग अपने नंबर का इंतजार करती रहीं। थक जातीं तो वहीं फर्श पर बच्चे को लिटाकर खुद बैठ जातीं। सीएमएस ने बताया कि सोमवार को करीब 2000 मरीज जिला अस्पताल में उपचार को पहुंचे। इस तरह सामान्य दिनों की तुलना में करीब 10 फीसदी मरीजों की संख्या अधिक रही।
ईएनटी न होने से हुई दिक्कत
नाक, कान, गला का चिकित्सक जिला अस्पताल में कई दिनों से नहीं है। उनकी कमी सोमवार को खासी खली। मरीज उन्हें पूछते रहे। सीएमएस डॉ. केएस गौतम ने भी इस दिक्कत को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में एक ईएनटी हैं, लेकिन वह दस दिन की छुट्टी पर गए हैं। उनके स्थान पर किसी अन्य ईएनटी की नियुक्ति के लिए एडी हेल्थ डॉ. प्रमिला गौड़ को कई दिन पहले पत्र भी लिखा जा चुका है, बावजूद इसके कोई ईएनटी नियुक्त नहीं किया जा सका है।
शुद्ध और शीतल पानी को तरसे
मरीजों और उनके तीमारदारों की सबसे अधिक भीड़ ओपीडी, दवा और पर्चा काउंटरों पर रही। इन कक्षों के निकट ही शुद्ध और शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से वाटर कूलर लगाए गए हैं, सोमवार को यह ठप रहे। इसके चलते मरीज शुद्ध पानी को तरसते रहे।