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देश को सोना दिलाना चाहती बरेली की बेटी मनीषा

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बरेली। लक्ष्य को ध्यान में रख कर मेहनत और लगन से की गई मेहनत जाया नहीं जाती। इसे सही साबित कर दिखाया है बरेली की बेटी मनीषा ने। कैंट निवासी ड्राइक्लीनर गोविंद प्रसाद की यह बेटी ने जब आठ साल पहले सेपक टाकरा खेल का अभ्यास शुरू किया तो उसकी साथी लड़कियों ने उसे सलाह दी कि वह इस खेल के बजाय कोई दूसरा खेल सीखे तो बेहतर होगा, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। अपनी मेहनत व लगन की बदौलत आज वह इंडिया टीम की खिलाड़ी है।
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मनीषा ने बताया कि 2008 में उसे पहली बार नेशनल गेम में खेलने का मौका मिला। उसकी टीम को गोल्ड मेडल मिला। इसके बाद उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 2014 में साउथ कोरिया में हुए 17वें एशियन गेम्स व 2018 में इंडोनेशिया में हुए एशियन गेम्स में उसे भारत की ओर से खेलने का मौका मिला। मनीषा ने बताया कि हालांकि उसकी टीम दोनों ही गेमों में कोई पदक नहीं झटक सकी, लेकिन प्रोत्साहन राशि के तौर पर उसे दोनों बार भारत सरकार से पांच-पांच लाख रुपये मिले। इसके अलावा वह 2013 से 18 तक लगातार वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेलती रही। इस बीच 2017 में उसकी टीम को ब्राउंस मेडल भी मिला। मनीषा बरेली क़ॉलेज बरेली की टीम से ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में भी गोल्ड मेडल प्राप्त कर चुकी है। वर्तमान में लुधियाना में बीबीए कर रही मनीषा की तमन्ना 2022 में होने वाले 19वें एशियन गेम्स में देश की टीम के लिए सोना लाने की है। मनीषा कहती है कि सेपक टाकरा की टीम का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है। मनीषा ने बताया कि देश में अभी भी तमाम ऐसी प्रतिभाएं हैं जो उभर कर सामने नहीं आ पा रही हैं। उन्होंने कहा कि अन्य खेलों की तरह केंद्र व प्रदेश सरकार इस खेल पर भी ध्यान दे तो देश से इस खेल के लिए काफी खिलाड़ी निकल कर सामने आएंगे। उसने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने परिवार के अलावा इंडिया टीम के कोच बीए शर्मा को दिया।
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