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चमगादड़ों पर ‘खत्म’ तकरार, अब हड़ताल से न करें नमस्कार

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बरेली। ‘प्रबुद्ध’ माने जाने वाले डॉक्टरों का संगठन आईएमए कुछ दिनों से अजीब सी कशमकश में घिरा हुआ है। पिछले दिनों आईएमए के व्हाट्सएप ग्रुप में ‘सूर्य नमस्कार’ पर ऐसी रार शुरू हुई जिसने डॉक्टरों के बीच धार्मिक आधार पर दो फाड़ कर दिए। ग्रुप में तीखी नोकझोंक के बीच चलते-चलते यह बहस ‘चमगादड़’ तक पहुंच गई तो 70 फीसदी से ज्यादा एक समुदाय के डॉक्टरों ने ग्रुप ही छोड़ दिया। इसी बीच बंगाल के मुद्दे पर हड़ताल का राष्ट्रीय आह्वान आया तो कुछ ‘जिम्मेदार’ डॉक्टर चेते। व्हाट्सएप पोस्ट से आहत होकर हड़ताल में भी शामिल होने से इनकार कर रहे डॉक्टरों को मना लिया गया, लेकिन आईएमए में आई दरार फिर भी नहीं भर पाई है। हड़ताल के बाद इस मुद्दे के फिर तूल पकड़ने के साफ आसार दिख रहे हैं।
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आईएमए के व्हाट्सएप ग्रुप करीब दस दिन पहले डाली गई जिस पोस्ट पर विवाद शुरू हुआ, वह एक ऐसे सर्जन की थी जिसे शहर में ज्यादा लोग नहीं जानते। इस पोस्ट में चांद को सेक्युलर बताते हुए सूर्य देवता से सवाल किया गया था कि ‘कुछ’ लोग उनका विरोध क्यों करते हैं, कहीं इसलिए तो नहीं क्योंकि श्रीराम सूर्य के कुल में पैदा हुए थे। इस पोस्ट पर किसी ने यह कमेंट कर आग में और घी डाल दिया कि ‘चमगादड़ों’ को ज्यादा रोशनी अच्छी नहीं लगती इसलिए..। इसके बाद ग्रुप में हलचल मच गई। डॉ. अनीस बेग ने इस पर तीखा विरोध जताया। उन्होंने ग्रुप में लिखा- चमगादड़ कह रहे हैं लोग तब भी लोग कन्डेम नहीं करते और ये होता तभी है जब कोई डिफरेंस पैदा करने वाली पोस्ट डालता है, कभी-कभी तो बिल्कुल नहीं लगता कि ये ग्रुप इन्टेलेक्चुअल्स का है। इसके बाद ग्रुप पर इस विवादित मुद्दे पर कमेंट दर कमेंट शुरू हो गए। किसी ने गुस्साए डॉक्टरों को समझाने और शांत करने की कोशिश की तो किसी ने आग और भड़काने वाले मेसेज डालने शुरू कर दिए।
आखिरकार नतीजा यह हुआ कि एक समुदाय के 70 फीसदी से ज्यादा डॉक्टरों ने आईएमए का ग्रुप ही छोड़ दिया। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र सिंह और सचिव डॉ. विनोद पागरानी के यूरोप दौरे पर होने की वजह से दूसरे वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस विवाद से किनारा कर लिया। हाल ही में आईएमए की बंगाल प्रकरण पर हड़ताल की कॉल आने के बाद ग्रुप छोड़ने वाले डॉक्टरों ने इस हड़ताल में भी शामिल होने से इनकार कर दिया तो तब खलबली मची। इसके बाद आईएमए पदाधिकारियों की नुमाइंदगी करने वाले दूसरे डॉक्टर सक्रिय हुए और नाराज तबके को मनाने की कोशिशें शुरू हुईं। आखिरकार नाराज डॉक्टरों ने भी हड़ताल में शामिल होने की सहमति दे दी, जिसके बाद फिलहाल मामला निपट गया लेकिन डॉक्टरों के बीच आई खटास कम नहीं हुई है। नाराज डॉक्टरों का आरोप है कि पूरे ग्रुप में सिर्फ चार-पाच डॉक्टर हैं जो इस तरह की विवादित पोस्ट और कमेंट करते हैं। इनमें एक तो एक राजनीतिक पार्टी के टिकट पर दावा कर रहे थे। दूसरे डॉक्टर कुछ समय पहले सपाइयों के निशाने पर रहे थे। इन्हीं के गुट में कुछ और डॉक्टर ऐसे हैं जो आईएमए के ग्रुप को राजनीति का अड्डा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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इधर दस दिन से तो आईएमए के व्हाट्सएप ग्रुप में इस विवादित मुद्दे पर कोई विवादित पोस्ट नहीं डाली गई है। जिन डॉक्टरों ने ग्रुप छोड़ा है, उन्हें जल्द वापस लाया जाएगा। - डॉ. आईएस तोमर, वरिष्ठ सर्जन एवं आईएमए के पूर्व अध्यक्ष

कम्युनल पोस्ट से मन खराब होता है। विवाद अपनी जगह है लेकिन आईएमए के फरमान पर हम सब एक हैं और हड़ताल में पूरी तरह शामिल होंगे। आईएमए एक परिवार की तरह रहे, यही चाहते हैं। - डॉ. अनीस बेग, पूर्व ट्रेजरार आईएमए
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