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भीषण गर्मी में जवाब देने लगे ट्रेनों के एसी

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बरेली। भीषण गर्मी में ट्रेनों के एसी भी अब जवाब देने लगे हैं। एक सप्ताह में दो ट्रेनों के एसी खराब हो चुके हैं। शनिवार को इंटरसिटी एक्सप्रेस का एसी खराब होने पर यात्रियों ने हंगामा किया। यात्रियों के तेवर देखते हुए स्टाफ ने एसी की मरम्मत करके ठीक किया। इसके बाद ही ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना हुई।
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इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी में ट्रेनों के एसी भी अब जवाब देने लगे हैं। शनिवार को बरेली से दिल्ली जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन जंक्शन से जाने के लिए प्लेटफार्म चार पर पहुंची। ट्रेन में दो एसी चेयर कार हैं, जिनमें एक कोच के एसी की कूलिंग काम नहीं कर रही थी। यात्रियों ने टीटीई को बताया तो उन्होंने बताया कि ट्रेन चलने के बाद कूलिंग होगी, जबकि दूसरे कोच का एसी कूलिंग कर रहा था। यह देखकर यात्रियों को हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि ट्रेनों के एसी खराब होना अब रोजाना की बात हो गई है। यात्रियों के तेवर देखकर स्टाफ ने तुरंत ही एसी की मरम्मत कर उसे दुरुस्त किया। जब कूलिंग शुरू हो गई तब ही यात्रियों ने ट्रेन को दिल्ली के लिए रवाना होने दिया। इस दौरान ट्रेन करीब बीस मिनट जंक्शन पर खड़ी रही। गौरतलब है कि 11 जून को टनकपुर-दिल्ली एक्सप्रेस का सेकेंड एसी कोच का भी एसी खराब हो गया था।
गुर्जर नेता निर्भय गुर्जर का कहना था कि पीलीभीत से ही एसी खराब था, लेकिन किसी भी स्टेशन पर सुनवाई नहीं हुई। तीन घंटे तक एसी कोच में यात्री गर्मी में यात्रा करते हुए चंदौसी पहुंचे। चंदौसी स्टेशन पर स्टेशन मास्टर ने मुरादाबाद स्टाफ को एसी के खराब होने की सूचना दी। मुरादाबाद में एसी की मरम्मत करके ठीक किया गया।
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गुवाहाटी एक्सप्रेस छह घंटे लेट, यात्री परेशान
दिल्ली से मुरादाबाद रूट डाउन लाइन की ट्रेनें घंटों देरी से जंक्शन पहुंची। लालगढ़ से गुवाहाटी अवध असम एक्सप्रेस छह, नई दिल्ली वाराणसी काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस डेढ़ घंटे, नई दिल्ली राजगीर श्रमजीवी एक्सप्रेस एक घंटा देरी से जंक्शन पहुंची। लखनऊ से दिल्ली रूट पर गुवाहाटी-लालगढ़ अवध असम एक्सप्रेस डेढ़, त्रिवेणी एक्सप्रेस एक घंटे देरी से जंक्शन पहुंची।

साधारण कोच बने गैस चैंबर, यात्री परेशान
दिल्ली लखनऊ रूट पर ट्रेनों की संख्या कम होने से साधारण कोच किसी गैस चेंबर से कम नहीं हैं। जंक्शन से दोपहर 12 बजे त्रिवेणी एक्सप्रेस गुजरने के बाद लंबी दूरी की अवध असम एक्सप्रेस है। ट्रेन में तीन साधारण कोच में तिल रखने की जगह नहीं थी। जंक्शन से भीड़ का चढ़ना मुश्किल था। ऐसे में कोच में यात्री भूसे की तरह भर गए। यात्रियों के पास कम किराए में साधारण कोच में यात्रा करने के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है। बता दें कि एक सप्ताह पहले साधारण कोच में दम घुटने से दो महिला यात्रियों की मौत भी हो गई थी।

जंक्शन पहुंची प्लास्टिक की डस्टबिन
लोहे की डस्टबिन गलने से अब रेलवे ने जंक्शन पर प्लास्टिक की डस्टबिन भेजी हैं। मुरादाबाद मंडल से करीब 156 डस्टबिन शनिवार को जंक्शन पहुंच गईं। गीले और सूखे कूड़े के लिए अलग-अलग डस्टबिन रखी गई हैं। यह डस्टबिन तीनों प्लेटफार्म पर रखी जाएंगी, जिससे लोग कूड़े को डस्टबिन में ही डालें। जंक्शन के स्थानीय अधिकारियों का कहना है स्वच्छता रेलवे की प्राथमिकता है।

जंक्शन पर पानी के लिए मारामारी
जंक्शन पर ट्रेन आने पर पानी की टंकियों पर यात्रियों की लाइन लग जाती है। टोटियों में पानी का प्रेशर कम होने के कारण प्रति यात्री अपनी बोतल भरने में काफी वक्त लग जाता है, ऐसे में ट्रेन छूटने का भय यात्रियों में बना रहता है, जिसका सीधा फायदा स्टेशन पर पानी बेच रहे वेंडरों को होता है। यहां बता दें कि जंक्शन पर यात्रियों के हिसाब से पानी की टोटियां कम हैं। वाटर कूलर भी तीन ही हैं जो हजारों यात्रियों के लिए कम पड़ जाते हैं। शनिवार को जनसेवा एक्सप्रेस में यात्री पानी के लिए भटकते रहे। लाइन में जैसे ही पानी भरने का नंबर आया, ट्रेन चल दी। यात्री बोतल लेकर भागते हुए ट्रेन में चढ़ गए।
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