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पार्षदों का अब नगर आयुक्त के दफ्तर पर कब्जा पुलिस वालों ने पहले रोका फिर खुद खिसक गए

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बरेली। नगर आयुक्त के खिलाफ आंदोलन कर रहे पार्षदों के साथ बृहस्पतिवार को नगर निगम में पूरी भाजपा के उतर आने के बाद पुलिस और प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। शुक्रवार को भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच पार्षदों ने जबरन नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर बैठकर धरना-प्रदर्शन किया। पुलिस वालों ने पहले उन्हें रोकने की कोशिश की और बाद में खुद एक-एक कर वहां से खिसक गए। इस बीच नगर आयुक्त चौथे दिन भी अपने कार्यालय नहीं पहुंचे।
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इंदिरा मार्केट और जिला पंचायत रोड पर अवैध रूप से पोर्टेबल शॉप रखवाकर दुकानदारों से लाखों रुपये की वसूली किए जाने के मामले में प्रशासन की जांच के बाद नगर आयुक्त के आदेश पर पार्षद विनोद सैनी और व्यापारी नेता दर्शनलाल भाटिया पर एफआईआर दर्ज करा दी गई थी, जिसके खिलाफ भाजपा के पार्षद एक जून से नगर निगम में आंदोलन कर रहे हैं। पार्षदों के धरना-प्रदर्शन के बीच ईद से पहले नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन लंबी छुट्टी चले गए थे। उम्मीद थी कि इस बीच मामला ठंडा हो जाएगा, लेकिन मंगलवार को वह छुट्टी से लौटे तो पार्षद और उग्र हो गए। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए नगर निगम परिसर में धारा 144 भी लागू कर दी, लेकिन इसका उल्टा असर हुआ। पार्षदों के साथ पूरे जिले की भाजपा आ गई।
बृहस्पतिवार को पुलिस की नाकाबंदी तोड़कर पार्षदों ने भाजपा के नेताओं के साथ प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर हंगामा भी हुआ। धारा 144 लागू होने की वजह से नगर निगम में भाजपाइयों और पार्षदों को रोकने के लिए पुलिस तो तैनात कर दी गई लेकिन प्रशासन का कोई अफसर यहां नहीं पहुंचा। इसका फायदा उठाकर मेयर ने इंस्पेक्टर कोतवाली को जमकर हड़का भी दिया। शुक्रवार को सुबह पार्षद जब धरना देने पहुंचे तो नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर काफी पुलिस फोर्स तैनात था। पुलिस वालों ने पार्षदों से नगर आयुक्त कार्यालय के बरामदे को छोड़कर बाहर धरना देने को कहा लेकिन पार्षद इसका विरोध करने लगे और जबरन कार्यालय के सामने धरने पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद धीरे-धीरे पुलिस वाले वहां से खिसक गए। पूरे दिन धरना प्रदर्शन के बाद शाम साढ़े चार बजे पार्षदों ने नगर आयुक्त का पुतला बनाकर जूतों से पिटाई की। इस दौरान उपनेता छंगामल मौर्य, उपसभापति अतुल कपूर, सतीश कातिब, नरेश शर्मा बंटी, अजय चौहान, विनोद सैनी, अशोक गंगवार, चमन सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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नगर आयुक्त के पक्ष में शुरू हुई लामबंदी
शुक्रवार को सिविल सोसाइटी के बैनर तले कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा गया जिसमें कहा गया कि कुछ पार्षद और व्यापारी नेताओं ने भ्रष्टाचार कर पोर्टेबल शॉप लगवाई थीं। इस मामले रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मेयर के नेतृत्व में अवैध रूप से धरना प्रदर्शन किया जा रहा है क्योंकि ये लोग नहीं चाहते हैं कि भ्रष्टाचार की परतें खुलें। साथ ही आरोप लगाया कि शहर में अवैध यूनिपोल लगाकर भी भ्रष्टाचार किया गया है। इन लोगों ने यह भी कहा है कि मेयर की हठधर्मिता से करोड़ों की लागत से बना रजऊ परसपुर का सॉलिड वेस्ट प्लांट भी बंद पड़ा है। ज्ञापन देने वालों ने इन सभी बिंदुओं पर जांच की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में डॉ. प्रदीप कुमार, राज नारायण गुप्ता, अनुज कांत सक्सेना, मो. खालिद जीलानी, जगदीश निमिष आदि मौजूद रहे।
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