फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षकों को नापने में माहिर अफसर अपने काम में निकले फिसड्डी

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। वेतन रोकने-काटने और निलंबन जैसी कार्रवाई को अगर पैमाना माना जाए तो बेसिक शिक्षा विभाग खुद ब खुद सारे सरकारी विभागों में सबसे भ्रष्ट और निकम्मा विभाग साबित हो जाता है। आमतौर पर ऐसी सभी कार्रवाई शिक्षकों के ही खिलाफ होती हैं, जबकि असलियत यह है कि कामचोरी और निकम्मेपन की पैठ शिक्षकों से कई गुना ज्यादा उनके अफसरों में हैं। मिसाल यह है कि पिछले सत्र में शासन ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने क्षेत्र में न्यूनतम 50 फीसदी स्कूलों का निरीक्षण कर पठन-पाठन के स्तर की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद कई ब्लॉकों में एक भी स्कूल का निरीक्षण नहीं किया गया। अब शिक्षा निदेशक ने बीएसए को इसके लिए जिम्मेदार मानते हुए लापरवाह खंड शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति भेजने का आदेश दिया है।
विज्ञापन

बेसिक स्कूलों में लगातार शैक्षिक स्तर गिरने की शिकायतों पर शासन ने सभी बीईओ को अपने कार्यक्षेत्र के न्यूनतम 50 प्रतिशत स्कूलों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे ताकि उनमें शिक्षकों की मौजूदगी, शैक्षिक स्तर, साफ-सफाई जैसे विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी मिल सके। साथ ही रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें। शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह की ओर से जारी पत्र के अनुसार एक जनवरी से 31 मार्च तक बीईओ को निरीक्षण रिपोर्ट दीक्षा पोर्टल पर अपलोड करनी थी। अब पोर्टल पर जो सूचना अपलोड की गई है, उसके अनुसार जिले के एक भी खंड शिक्षा अधिकारी ने 50 प्रतिशत स्कूलों का निरीक्षण नहीं किया। कई ब्लॉकों में तो एक भी स्कूल का निरीक्षण नहीं हुआ। शासन ने अधिकारियों की लापरवाही का जिम्मेदार बीएसए को मानते हुए उनके वार्षिक कार्य निष्पादन के मूल्यांक में इसे शामिल करने को कहा है। साथ ही सभी बीईओ से स्पष्टीकरण लेकर कार्रवाई किए जाने की संस्तुति आख्या निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।

काम है ज्यादा इसलिए नहीं कर पाए निरीक्षण
स्कूलों का निरीक्षण न करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी अब यह बहाना बना रहे हैं कि उनमें से कई पर अतिरिक्त ब्लॉकों का प्रभार है। उनके मुताबिक जिले में 18 के बजाय सिर्फ दस खंड शिक्षा अधिकारी तैनात हैं। एक ब्लॉक में 240 स्कूल हैं। कई अधिकारियों दो या तीन ब्लॉकों का प्रभार है। एक अधिकारी ऐसे में कैसे 480 और 720 स्कूलों का निरीक्षण कर सकता है। दूसरी ओर सवाल यह भी उठ रहा है कि एक अधिकारी को तीन ब्लॉकों का कार्यभार क्यों दिया गया है। इसके अलावा सभी 18 ब्लॉकों में सिर्फ 12.5 फीसदी स्कूलों का निरीक्षण हुआ है जबकि खंड शिक्षा अधिकारियों की संख्या करीब साठ फीसदी है।
विज्ञापन


शेरगढ़ में सबसे ज्यादा, नवाबगंज-फरीदपुर में जीरो
ब्लॉक निरीक्षण विद्यालय प्रतिशत
आलमपुर 54 240 22.5
आंवला 03 240 1.25
बहेड़ी 15 240 6.25
बहेड़ी शहर 02 240 0.83
बरेली शहर 69 240 28.75
भदपुरा 01 240 0.42
भुता 71 240 29.58
फरीदपुर 02 240 0.83
फरीदपुर शहर 00 240 0
फतेहगंज 25 240 18.75
क्यारा 43 240 17.92
मझगवां 36 240 15.0
मीरगंज 19 240 7.92
नवाबगंज 00 240 0
रामनगर 63 240 26.25
रिछा 19 240 7.92
शेरगढ़ 74 240 30.83
बिथरी चैनपुर 23 240 9.58

एक खंड शिक्षा अधिकारी पर दो से ज्यादा ब्लॉकों का प्रभार होने के बाद भी कुछ बीईओ ने संतोषजनक कार्य किया है। संबंधित रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का संस्तुति पत्र शासन को भेजा जाएगा।
विज्ञापन

- तनुजा त्रिपाठी, बीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें