बरेली। हाल ही में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एन्ट्रेंस टेस्ट यानी नीट का रिजल्ट आने के बाद महिमा शाह कोई साधारण नाम नहीं रह गया। महिमा की ‘महिमा’ जिसने भी सुनी, दांतों तले अंगुली दबा ली। मुश्किल से यकीन हो पाया कि नीट क्वालीफाई करने वाली 18 साल की यह लड़की शत-प्रतिशत दिव्यांग है और अपने पैरों पर चलना तो दूर अपने हाथों से किताब के पन्ने तक नहीं पलट सकती। हालांकि महिमा के मम्मी-पापा को उस पर पूरा भरोसा था। इसी भरोसे में वे नीट में महिमा को राइटर की सुविधा दिलाने के लिए पीएमओ तक जा पहुंचे। मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की पहल पर प्रावधान न होने के बावजूद महिमा को नीट में शामिल होने के लिए राइटर मिला और फिर उसने वो कर दिखाया जो इतिहास बन गया।
स्पॉस्टिक सेरेब्रल पैल्सी से ग्रसित महिमा पैदाइशी दिव्यांग है। स्वप्नलोक प्यारेलाल कॉलोनी में रहने वाले उसके पिता शैलेंद्र शाह के मुताबिक मां के गर्भ में ही महिमा के पेट में गंदा पानी चला गया था, इसी ने उसे सेरेब्रल पैल्सी का शिकार बना दिया। जन्म के तीन साल बाद महिमा ने बैठना शुरू कर पाई और साढ़े तीन वर्ष में बोलना। शैलेंद्र शाह बताते हैं कि नर्सरी में उन्होंने महिमा का दाखिला पड़ोस के एक स्कूल में करा दिया था लेकिन वह अच्छे स्कूल में पढ़ने को कहती थी। चौथी से से 10वीं तक उसकी पढ़ाई वेदी इंटरनेशल स्कूल में हुई। मगर इससे पहले सौ प्रतिशत दिव्यांग होने की वजह सीबीएसई ने 9वीं क्लास में पहुंची महिमा का रजिस्ट्रेशन करने से इनकार कर दिया। उन्हें सीबीएसई के खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट जाना पड़ा। हाईकोर्ट के आदेश पर महिमा का रजिस्ट्रेशन हुआ जिसके बाद 10वीं की परीक्षा उसने 88 प्रतिशत अंक लेकर पास की। 11वीं में महिम का दाखिला केंद्रीय विद्यालय आईवीआरआई में हुआ। 12वीं की परीक्षा में उसे 83.2 प्रतिशत अंक मिले। अब उसने नीट क्वालीफाई किया है।
प्रकाश जावड़ेकर दो दिन पहले दिलाई राइटर की अनुमति
वेटरनरी विहैवियर पर रिसर्च करना चाहती है महिमा
महिमा के पिता शैलेंद्र शाह आईवीआरआई में टेक्निकल ऑफिसर हैं। उन्होंने बताया कि महिमा बीबीएसई करना चाहती है जिसके लिए नीट क्वालीफाई करना जरूरी है। महिमा ने नीट का फार्म तो भर दिया लेकिन बगैर राइटर की सुविधा मिले वह यह परीक्षा नहीं दे सकती थी। परीक्षा में राइटर मिलने का प्रावधान भी नहीं था। लिहाजा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर महिमा को राइटर दिलाने की फरियाद की। एक न्यूज चैनल के रिपोर्टर ने भी पीएम और केंद्रीय मंत्री से बातचीत की। परीक्षा से दो दिन पहले राइटर की अनुमति मिल गई। शैलेंद्र के मुताबिक नीट क्वालीफाई करने के लिए 720 में 120 अंक चाहिए। जबकि महिमा को नीट परीक्षा में 157 अंक मिले हैं। शैलेंद्र ने बताया कि महिमा का इरादा आईवीआरआई में ही बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस यानी बीवीएससी करने का है। इसके बाद वह वेटरनरी विहैवियर पर भी रिसर्च करना चाहती है। हालांकि इसके लिए उसे विदेश जाना पड़ेगा।
पन्ने पलटती थीं मां, पिता पहुंचाते थे स्कूल
टॉयलेट से लेकर महिमा के सारे व्यक्तिगत काम उसके मम्मी-पापा ही करते हैं। शैलेंद्र शाह महिमा को उसकी व्हीलचेयर के साथ कार में स्कूल पहुंचाते थे और छुट्टी के बाद घर लाते थे तो घर पर महिमा के काम करने की जिम्मेदारी मां स्मिता संभालती हैं। महिमा की पढ़ाई के लिए किताब के पन्ने तक स्मिता को पलटने होते हैं। स्कूल में शिक्षक और साथी भी महिमा का काफी ख्याल रखते हैं।
रोज चार घंटे की पढ़ाई, नाक से चलाती है मोबाइल और लैपटॉप
शैलेंद्र ने बताया कि स्कूल के दिनों में महिमा सुबह छह बजे जागती है। उसे तैयार करने के बाद स्कूल भेज दिया जाता है। स्कूल से लौटने पर चार बजे तक आराम करती है। चार से पांच बजे तक फिजियोथैरेपी होती है। इसके बाद पांच से नौ बजे तक अपनी मां की मदद से महिमा लगातार पढ़ती है। हाथ-पैर के काम न करने के बावजूद महिमा मोबाइल और लैपटॉप चला लेती है। इसके लिए वह अपनी नाक का इस्तेमाल करती है।
मोटर न्यूरॉन काम नहीं करते
महिमा के फिजियोथैरेपिस्ट ज्ञान रतूड़ी ने बताया कि महिमा स्पॉस्टिक सेरेबरल पैल्सी जन्मजात होती है। न्यूरॉन के काम न करने की वजह से इसमें शरीर के अंगों का मूवमेंट नहीं होता लेकिन दिमाग सामान्य तौर पर काम करता है। वह चार साल से महिमा की फिजियोथैरेपी कर रहे हैं। पहले से करीब 40 प्रतिशत सुधार है।