बरेली। एनएचएआई की लापरवाही सफर के खतरे बढ़ाती जा रही है। दिल्ली-लखनऊ हाईवे तो कई सालों से खतरनाक है ही, बरेली-सितारगंज वाया पीलीभीत हाईवे भी अब उसी हद पर पहुंच गया है। 2014 में 279 करोड़ लागत से बरेली को उत्तराखंड से जोड़ने के लिए शुरू हुए प्रोजेक्ट में दस मीटर चौड़ी टू लेन सड़क बननी है लेकिन इसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि पांच साल बाद भी जल्द इसके पूरा होने के आसार तक नहीं दिख रहे। हालात ये हैं कि हाईवे पर पड़ने वाले तमाम पुल और पुलिया के पास सड़क अधूरी बनी छोड़ दी गई है। रिठौरा और नवाबगंज समेत तमाम जगह डिवाइडर तक टूटे पड़े हैं। दुर्घटनाओं से बचाव के लिए रोड सेफ्टी का कहीं कोई काम नहीं कराया गया है। फिर भी एनएचएआई के अधिकारी कांट्रेक्टर पर मेहरबान हैं। शिकंजा कसना दूर निर्माणाधीन हाईवे का सर्वे करने तक की फुर्सत नहीं निकाल पा रहे हैं। यह हालत तब है जब इस हाईवे पर हादसों में कई जानें तक जा चुकी हैं।
मयूर वन चेतना केंद्र के पास चौड़ी नहीं की रोड
हाईवे पर सबसे खतरनाक मोड़ मयूर वन चेतना केंद्र के पास है। यहां कई बड़े हादसे हो चुके हैं। अब यहां हवाई अड्डा भी शुरू होने वाला है। इससे यह मोड़ और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएगा। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने यहां रोड चौड़ा कराने के साथ रोड सेफ्टी के काम भी कराने के निर्देश दिए थे। फिर भी यहां ब्रेकर तक नहीं बनाए गए हैं। न ही कोई और काम हुआ है। इससे आगे रिछौला-आसपुर नहर की पुलिया के पास दोनों ओर हाईवे का काम अधूरा छोड़ दिया गया है। इससे यहां आए दिन वाहन टकराते रहते हैं। एनएचएआई ने यहां भी हादसों को रोकने के लिए कोई सेफ्टी के काम नहीं कराए हैं।
रिठौरा में डिवाइडर पर न पेंट न रेडियम सिग्नल
हाईवे पर रिठौरा में एनएचएआई ने डिवाइडर तो बना दिए लेकिन न तो उन पर पेंट कराया गया और न ही वाहन लेकर गुजरने वालों को अलर्ट करने के लिए रेडियम सिग्नल लगाए गए हैं। डिवाइडर पर पौधे भी न लगे होने से रात में सीधी हेडलाइट ड्राइवर की आंखों पर पड़ने से हादसे का खतरा बना हुआ है। रिठौरा चौकी के पास डिवाइडर टूट भी गए हैं। डिवाइडर पर कई बार वाहनों के चढ़ने से एक्सीडेंट हो चुके हैं। डिवाइडर से गाड़ी टकराने के दो हादसों में व्यापारी संजीव गुप्ता और पीलीभीत के अमित अग्रवाल की मौत हो चुकी है।
कांडू पुल के पास जरा सा चूके तो सीधे नदी में
नए कांडू पुल का काम भी अधूरा है। पुराने पुल के लिए एप्रोच रोड बनाई जा रही है। इस सड़क के आधे हिस्से में कई फुट ऊंची मिट्टी डालकर पटान कर दिया गया है जबकि बाकी आधे हिस्से को ऐसे ही छोड़ दिया गया है। पटान वाले हिस्से में अगर भूल से कोई वाहन चालक चढ़ जाता है तो उसके सीधे नदी में गिरने का खतरा है, इसके बावजूद यहां सुरक्षा बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। यही हाल पुल की दूसरी तरफ का भी है।
सिथरा-उदरनपुर के बीच सड़क पर बजरी
हाईवे पर सिथरा-उदरनपुर के बीच करीब आधा किलोमीटर लंबी सड़क को अधूरा छोड़ दिया गया है। उसके आगे हाफिजगंज बाईपास पर भी पुलिया का काम पूरा नहीं होने से हादसे का खतरा बना हुआ है। उसके आगे औरंगाबाद चीनी मिल मोड़ के पास पुल के दोनों ओर ढाई-ढाई सौ मीटर सड़क काफी खस्ताहाल हो चुकी है।
नवाबगंज में रामलीला ग्राउंड के पास ब्लैक स्पॉट
बाईपास पर अंबेडकर पार्क से एसआर पेट्रोल पंप तक डिवाइडर खस्ताहाल हैं। रामलीला ग्राउंड के पास तहसील चौराहा पर भी डिवाइडर टूटे होने और रेडियम सिग्नल न लगे होने से यहां आए दिन ट्रैक्टर ट्रॉली सहित दूसरे वाहन टकराते रहते हैं। हाईवे किनारे एक बड़े जनप्रतिनिधि सहित कई लोगों के बरातघर बने होने से एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है।
बिशनपुर गरगइया और खमरिया पुल भी खतरनाक
फायर स्टेशन से बिशनपुर गरगइया के पास तीन पुलिया के पास भी रोड का काम अधूरा पड़ा है। इसके आगे खमरिया पुल के पास भी आधा-आधा किलोमीटर तक रोड का काम अधूरा पड़ा है। आगे ललौरीखेड़ा में पुलिस चौकी और एसएसबी मुख्यालय के पास भी डिवाइडर की हालत खराब है। इनकी भी रंगाई पुताई नहीं कराई गई है।