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संस्कार और शक्ति का मेल बनाता है ‘अपराजिता’

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संस्कार और शक्ति का मेल बनाता है ‘अपराजिता’ - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। अमर उजाला के ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान के तहत शुक्रवार को कांती कपूर सरस्वती बालिका इंटर कॉलेज में मुख्य वक्ता दिव्यानंद महाराज ने बालिकाओं को सशक्त, शिक्षित, लक्ष्य के प्रति अडिग होकर शक्ति को आत्मबल बनाकर ‘अपराजिता’ बनने का मूलमंत्र दिया। कहा, संस्कार कमजोरी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि का परिचायक होते हैं और शक्ति से समाज को सुरक्षित किया जा सकता है। इन दोनों का तालमेल जिसमें होगा वही ‘अपराजिता’ बन सकती है।
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विद्यालय में चल रहे शौर्य प्रशिक्षण वर्ग के निर्देशन मंडल के रमाशंकर कौशिक और मणिकांत शर्मा ने बताया कि महिलाओं को अपनी शक्ति का एहसास न होने की वजह से ही वर्तमान में पितृसत्तात्मक सोच हावी है। समाज की इस पुरातनपंथी सोच को बदलने के लिए महिलाओं को अपनी शक्ति का भान समाज को कराना जरूरी है। उन्होंने अमर उजाला के अपराजिता अभियान को सराहते हुए कहा कि बालिकाओं को सशक्त, स्वावलंबी बनाने के लिए पुरुषों की सोच बदलने के लिए चलायी जा रही मुहिम से समाज की सोच परिवर्तित होगी। उन्होंने मौजूद बालिकाओं को रेल, बस यातायात समेत घर, समाज में सुरक्षित और देर रात में अकेले निकलने की स्वतंत्रता के लिए संस्कार के साथ शक्ति यानि आत्मरक्षा के गुर सीखने का सुझाव दिया।

आत्मरक्षा का दिया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में मीनू शर्मा ने बालिकाओं को आत्म रक्षा का प्रशिक्षण दिया, जिसमें छात्राओं ने बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया। इसमें एक दूसरे पर प्रहार कर बचाव के तरीके बताए गए। साथ ही उन्हें युद्ध कौशल के अन्य तरीकों से भी परिचित कराते हुए संस्कारशाला में संस्कारों के महत्व की जानकारी दी गई, जिसके बाद डॉ. मणिकांत शर्मा ने मौजूद बालिकाओं और अन्य मौजूद लोगों को अपराजिता की शपथ दिलाई। यहां हिमाचल सिंह, राधा गुप्ता, मीनू शर्मा मौजूद रहीं।
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