बरेली। केंद्र की मोदी सरकार ने इस बार महात्मा गांधी ग्रामीण स्वरोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के काम कराने का दायरा बढ़ा दिया है। अब मनरेगा में सार्वजनिक काम केवल 20 प्रतिशत और व्यक्तिगत काम 80 प्रतिशत कराए जाएंगे। अब किसान अपने खेत में पेड़ लगवाने, व्यक्तिगत तालाब खुदवाकर मछली पालन करने, आम-अमरुद के बाग लगाने समेत 200 से ज्यादा काम मनरेगा से करा सकता है। इन कामों में लेबर और सामग्री का खर्च मनरेगा से दिया जाएगा।
बीते साल मनरेगा में 70 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य था। इसमें केवल 45 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए थे। 20 लाख मानव दिवस सृजित किए गए थे, जिन पर 35 करोड़ रुपये और 10 करोड़ सामग्री पर खर्च हुए थे। केंद्र सरकार ने तेलंगाना की तर्ज पर मनरेगा से किसानों को सीधे फायदा पहुुंचाते ही इसका बजट बढ़ाकर 91 करोड़ रुपये कर दिया है। इसमें 30 लाख मानव दिवस सृजित कर गांव के मनरेगा जॉब कार्डधारकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। बाकी 36 करोड़ रुपये सामग्री पर खर्च किए जाएंगे। बरेली में वर्ष 2019-20 में मनरेगा से 1200 तालाब खुदवाकर उनमें 41 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। किसान अगर अपने खेत में आम, अमरूद समेत किसी के भी पौधे लगवाना चाहते हैं तो आवेदन करने पर इसके लिए उनको मनरेगा से बजट उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों को पौधों की केवल देखरेख करनी है। पूरा खर्च मनरेगा से मिलेगा। यह सुविधा अभी केवल दो हेक्टेयर जमीन तक के किसानों को मिलेगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के आवेदकों को वरीयता दी जाएगी। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि किसान अपने खेत की मेड़ पर पापुलर, यूकेलिप्टस समेत किसी भी प्रजाति के पेड़ मनरेगा से लगवा सकेंगे। मगर, शर्त यह होगी कि उनकी परवरिश खुद किसानों को करनी होगी। पौधों का बीज भी सरकारी नर्सरी से दिलाया जाएगा। अगर कोई किसान जैविक खेती के वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाना चाहते हैं तो मनरेगा से उसका खर्च वहन किया जाएगा। पुराना तालाब खुदवाकर पानी भरने का खर्च भी मनरेगा से मिलेगा।