बरेली। सोमवार को सोमवती अमावस्या समेत त्रिग्रही योग के शुभ संयोग पर वट सावित्री का विधि विधान से पूजन कर सुहागिनों ने पति की दीर्घायु समेत सुख समृद्धि की कामना की। पूजन के लिए भोर से ही घरों में तैयारियों का दौर शुरू हो गया था। शुभ मुहूर्त दोपहर तीन बजे तक होने से सुबह से ही मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए भक्त उमड़ना शुरू हो गए थे।
वट सावित्री पूजन के लिए सुबह घरों में प्रसाद के पकवान और पूजन थाल तैयार कर महिलाएं वट वृक्ष के पास पहुंची। वट वृक्ष का तिलक कर, फूल माला चढ़ाकर आरती उतारी और फिर वट सावित्री का पाठ कर पूजन संपन्न किया। कालीबाड़ी मंदिर स्थित काली माता मंदिर के सामने वटवृक्ष पर सुबह पांच बजे से ही सुहागिनों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो दोपहर ढाई बजे तक जारी रहा। इसके बाद महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश कर मां काली का दर्शन कर मनौती मांगी। कु छ श्रद्धालुओं ने पूर्व में मांगी मनौती पूरी होने पर शर्बत और हलवा वितरण किया।
वट वृक्ष ढूंढती रहीं सुहागिनें
मान्यता के अनुसार वट सावित्री पूजन वट वृक्ष की छांव में ही किया जाता है। वट वृक्ष की जड़ों में जल अर्पित करने से ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों तृप्त होकर मनोकामना पूरी करते हैं। असमंजस ये कि शहर से वट वृक्ष खत्म हो रहे हैं। शहर में वट वृक्षों की सीमित संख्या की वजह से सुहागिनों को पूजन में काफी समस्या का सामना करना पड़ा। सुबह वट वृक्ष खोजते हुए दूर-दराज से महिलाएं काली माता मंदिर पहुंची थी। आजाद नगर निवासी नवविवाहिता अश्विनी ने बताया कि वे करीब आधे घंटे तक पति के साथ वटवृक्ष खोजती रहीं। मंदिर में पूजन करने आए थे लेकिन सामने वट वृक्ष मिला तो विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ।