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नेताजी के कॉलेज हैं, सोच-समझकर होगी कार्रवाई

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बरेली। माननीयों से जुड़े कॉलेज और उनके छात्र-छात्राओं द्वारा कोडिंग तोड़ने की कोशिश को विश्वविद्यालय ने जांच के नाम पर नजरअंदाज कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि मामले में विश्वविद्यालय आरोपी छात्र-छात्राओं की कापियां अलग से जंचवाकर मामले को रफा-दफा करने में जुटा है।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस में 17 मई को बीपीएड की परीक्षा में केंद्र प्रभारी प्रो. अमित सिंह ने सनसनीखेज मामला पकड़ा था। मीरगंज के आरपी डिग्री कॉलेज और मुरादाबाद के रुक्मिणी डिग्री कॉलेज के 25 छात्र-छात्राओं ने अपनी उत्तर पुस्तिका पर रोल नंबर और कॉलेज का नाम लिख दिया था। साथ ही कुछ कोडवर्ड भी लिखे थे। यह मामला विश्वविद्यालय की कोडिंग व्यवस्था को ध्वस्त कर मूल्यांकन में सेंधमारी का था। प्रो. अमित सिंह ने मामले को सामूहिक नकल मानते हुए कार्रवाई के लिए परीक्षा विभाग को भेज दिया। वहां से मामले को यूएफएम (अनफेयर मीन्स) कमेटी को भेज दिया। प्रो. अमित सिंह का मानना है कि बिना प्लानिंग के इतने छात्र एकसाथ यह हरकत नहीं कर सकते। बाद में पूरे घटनाक्रम के पीछे एक डिग्री कॉलेज के प्राचार्य का नाम सामने भी आया। मगर दोनों ही डिग्री कॉलेज मौजूदा और पूर्व जनप्रतिनिधि से ताल्लुक रखते हैं इसलिए विश्वविद्यालय ने कड़ी कार्रवाई से कदम पीछे खींच लिए। सूत्रों की मानें तो इस मामले में विश्वविद्यालय सिर्फ इन छात्र-छात्राओं की कापियां ही अलग से चेक कराने के मूड में हैं। इस प्लानिंग के पीछे काम कर रहे दिमाग को ढूंढने और कार्रवाई की कोई जहमत नहीं उठा रहा है। साथ ही, परीक्षा विभाग इस मामले को सामूहिक नकल मानने से भी इनकार कर रहा है।
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