बरेली। राजस्व अभिलेखागार की दशकों पुरानी खतौनियों की हिफाजत करने में प्रशासन की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है। राजस्व के इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों के ऑनलाइन न होने पर उनके खुर्द-बुर्द होने की आशंका बनी रहती है। सिस्टम की इसी लचर व्यवस्था का फायदा उठाकर घोटालेबाजों ने अभिलेखगार से पहले खतौनियों को इधर से उधर किया और फिर उन्हें खुरचकर करोड़ों की जमीन घोटाले को अंजाम दे डाला। इस तरह से गंभीर मामले सामने आने के बावजूद खतौनियों की सुरक्षित करने के उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
कलक्ट्रेट स्थित रिकार्ड रूम में ब्रिटिशकाल की बेहद पुरानी खतौनियां रखी हैं। इनके साथ ही चार से पांच दशक पुरानी खतौनियों के तमाम कागजों में दीमक लगने से खराब हो चुके हैं या फिर बारिश और मौसम की मार में गल रहे हैं। पुराने रिकॉर्ड को जल्द दुरुस्त नहीं किया गया तो इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को लेकर बड़ा संकट पैदा हो सकता है। वर्ष 2006 के बाद से खतौनियों का ऑनलाइन रिकॉर्ड मौजूद है लेकिन इससे पूर्व की खतौनियां अभी भी मैनुअल ही है। इसलिए इसमें खुर्द-बुर्द की संभावना भी बनी रहती है। हालांकि वर्ष 2012 में शासन ने एक निजी कंपनी को पुरानी खतौनियों के डाटा को अपलोड कर उन्हें ऑनलाइन करने के लिए ठेका दिया था। कंपनी के स्टाफ ने राजस्व अभिलेखगार के पास ही एक रूम में बकायदा ऑफिस बनाकर उसमें तमाम कम्प्यूटर भी लगाए थे। कंपनी ने कुछ समय तक काम तो किया लेकिन बाद में कम्प्यूटर सेट वहीं छोड़कर फरार हो गए। इसके बाद से खतौनियों को ऑनलाइन करने के लिए अफसरों ने अब तक दोबारा कोई प्रयास भी नहीं किए। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने चेकिंग के दौरान इस पर असंतोष जाहिर किया था।
खतौनियों को रिकार्ड रूम से बाहर न ले जाने की सख्त हिदायत
-एसीएम फर्स्ट मदन सिंह ने सोमवार को रिकार्ड रूम में पहुंचकर व्यवस्थाएं चेक की। उन्होंने कहा कि कोई भी स्टाफ खतौनियों की नकल ले जाने के लिए उन्हें रिकार्ड रूम से बाहर न ले जाए। स्टाफ ने एसीएम को बताया कि स्टाफ की कमी से दिक्कत हो रही है।
कई साल से खतौनियों की बाइंडिंग कराने के लिए नहीं मिला बजट
-खतौनियों काफी फट रही हैं। इसकी जिल्दों को भी उधड़ने से नहीं रोका जा पा रहा है। इसके लिए रिकार्ड रूम का स्टाफ कई बार चार से पांच लाख रुपये का बजट मांग चुका है। इसके बाद कई बार लिखा-पढ़ी भी हुई लेकिन खतौनियों को दुरुस्त कराने के लिए कोई बजट भी नहीं मिला है।
रिकार्ड रूम में खतौनियों की बाइंडिंग के लिए बजट की डिमांड का लेटर फिर से भेजा गया है। रिकार्ड रूम का नियमित निरीक्षण होगा। कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। - मदन सिंह, अपर सिटी मजिस्ट्रेट प्रथम