बरेली। प्रदूषण को खत्म कर शुद्ध वातावरण मुहैया कराने वाले पेड़ों की जान बीडीए ठेकेदार की कारगुजारी से सांसत में आ गई है। पार्क के सौंदर्यीकरण के दौरान पेड़ों के तने से सटाकर बनायी गई सड़क की वजह से पेड़ों को पानी नहीं मिल पा रहा है। तने के इर्द गिर्द सड़क की जकड़न से उनका विकास प्रभावित हो गया है। पिछले करीब साल भर में दर्जन भर से अधिक हरे पेड़ सूख चुके हैं।
पिछले साल बीडीए ने 70 लाख रुपये के बजट से डीडीपुरम स्थित उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण के पार्क का सौंदर्यीकरण कराया था। पार्क में छह सीमेंटेड सीटें, आठ हैलोजन लाइट, दो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सीसी टाइल्स से पाथ वे (सड़क) का निर्माण कार्य हुआ था। निर्माण कार्य के दौरान 50 से ज्यादा गुलनार, कचनार समेत अन्य छायादार पेड़ों के तने से सटाकर सड़क बनाए जाने पर मौजूद माली सुरेश ने आपत्ति दर्ज करायी थी। उद्यान विभाग के अफसरों को भी मामले की जानकारी दी थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। माली के मुताबिक पिछले करीब साल भर में गुलनार और कचनार के दर्जन भर से अधिक पेड़ सूख चुके हैं और जल्द ही छह पेड़ और सूखने वाले हैं। जिनके स्थान पर माली ने नए पौधे रोपे, लेकिन उनका विकास नहीं हो सका।
40 साल कम हो गई पेड़ों की उम्र
बरेली कॉलेज बॉटनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आलोक खरे ने बताया कि गुलनार, कचनार और जंगली छायादार पेड़ों की उम्र अधिकतम 50 वर्ष होती है। इन प्रजातियों के पौधे पांच साल में पेड़ बनने शुरू हो जाते हैं। इसी दौरान उनके तने से सटकर सड़क बना दी जाए तो अधिकतम पांच साल में वे सूख जाएंगे। दो-तीन वर्ष पूरे करने वाले पेड़ महज साल भर में ही सूख जाएंगे। क्योंकि सड़क बनने से उनकी जड़ों में सीधे पानी नहीं पहुंचेगा। आसपास की नमी को अवशोषित कर वे साल दो या तीन साल तक ही जीवित रह सकते हैं। पेड़ बेहद कमजोर होते हैं, इसलिए वे सड़क को फाड़कर खुद का विकास करने में असमर्थ होते हैं।
बुझ चुकी हैं लाइट और टूट गई हैं कुर्सियां
अच्छा खासा बजट खर्च कर पार्क के सौंदर्यीकरण के नाम पर बड़ा ‘खेल’ हुआ है। पार्क में लगाई गई आठ लाइट में आधे से ज्यादा खराब हो चुकी हैं। पार्क में घूमने आने वालों के बैठने के लिए लगायी गई छह कुर्सियों में चार कुर्सियां टूट चुकी हैं। अन्य कुर्सियों की स्थिति भी खराब है। माली के मुताबिक ठेकेदार की ओर से कराए गए निर्माण कार्य का सत्यापन करने भी कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।