बरेली। सपा-बसपा गठबंधन की दोनों लोकसभा सीटों पर भाजपा के हाथों करारी हार के बाद समाजवादी पार्टी में घमासान मच गया है। पूर्व सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव ने कहा कि वैसे तो दोनों लोकसभा सीटों पर सपा को अब तक के चुनावों में सबसे ज्यादा वोट मिले हैं, लेकिन गठबंधन प्रत्याशियों की हार भाजपा के दुष्प्रचार की वजह से हुई। हार के लिए सपा की चुनाव संचालन कमेटी के सदस्य संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं।
शुभलेश यादव ने कहा कि बरेली और आंवला सीटों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की। मगर भाजपा ने इतना दुष्प्रचार कर दिया, जिसमें मतदाता एक बार फिर झूठे वादों के भ्रम में फंस गए। पार्टी को हार के रूप में इसका परिणाम भुगतना पड़ा। शुभलेश ने कहा कि वैसे पार्टी का संगठन तो छह माह पहले से ही भंग था, लेकिन पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए संचालन कमेटी बनाई थी। इसमें पार्टी के सभी पूर्व विधायक, जिला और महानगर के पूर्व जिला और महानगर अध्यक्ष आदि शामिल थे। पार्टी के एक पूर्व सांसद चुनाव के समय कांग्रेस में चले गए तो ऐन मौके पर लोकसभा प्रत्याशी ने कुछ नए लोग भी संचालन कमेटी में शामिल करा लिए। चुनाव में जनता ने गठबंधन को बड़े पैमाने पर सपोर्ट किया। वोट भी अच्छे मिले, लेकिन जीत नहीं पाए। शुभलेश ने बताया कि मतगणना के बाद वह बाहर चले गए थे। उनका मोबाइल पानी में गिरकर खराब हो गया, इसलिए मोबाइल बंद था। मुख्यालय से चुनाव लड़ाने को भेजे गए 20 लाख रुपयों के बारे में कहा कि उनको मुख्यालय से भेजा कोई पैसा नहीं मिला। कुछ लोग जानबूझकर उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।
लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी उसकी है, जो अपनी जिम्मेदारी समझे। अब अगर कोई जिम्मेदारी समझना ही नहीं चाहता तो उस पर क्या जिम्मेदारी डाली जा सकती है।
- भगवत सरन गंगवार, प्रत्याशी लोकसभा सपा-बसपा गठबंधन
जब पार्टी हारती है तो वह हार सबकी होती है। सपा-बसपा गठबंधन दोनों सीटों पर चुनाव हारा है तो वह जिम्मेदारी सबकी सामूहिक है और चिंताजनक है। हम सब मिलकर बैठेेंगे और अपनी कमियां तलाशेंगे। 2022 में दोबारा मजबूती से भाजपा का फिर से मुकाबला करेंगे।
- अताउर्रहमान, पूर्व प्रवक्ता सपा
जिला और महानगर संगठन तो छह माह पहले से ही भंग था। इसके लिए संचालन कमेटी बनी थी। लोकसभा चुनाव में हम ज्यादा वोट लेकर भी हार गए। संचालन कमेटी हार के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार है।
- शुभलेश यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष सपा
सात बार के एमपी से चुनाव था। जनता ने प्रत्याशी नहीं देखा। मोदी के नाम पर वोट दे दिया। हम सबने मिलकर मेहनत की, मगर समीकरण हमारे पक्ष में नहीं थे। अब फिर से संगठन दुरुस्त करेंगे और अपनी कमियां दूर कर अगले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
- सुल्तान बेग, पूर्व विधायक मीरगंज
हम चुनाव में जितना कर सकते थे, पूरी ईमानदारी से काम किया। पिछली बार के मुकाबले शहर और कैंट से सपा को वोट भी ज्यादा मिले हैं। मगर जिन लोगों के हाथ में कमान थी, उनकी भूमिका ठीक नहीं थी। कंडीडेट देखते कि किससे कैसा काम लेना है।
- कदीर अहमद, पूर्व महानगर अध्यक्ष सपा
बसपा में हार के बाद से घोर ’अंधकार’
बरेली। सपा-बसपा गठबंधन में आंवला से बसपा के टिकट पर रुचिवीरा चुनाव लड़ रही थीं। उनको भी भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप के हाथों हार का सामना करना पड़ा है। बसपा जिलाध्यक्ष राजेश सागर ने बरेली मंडल की पांचों सीटों पर जीत के दावे किए थे। मगर चुनाव परिणाम उम्मीद के विपरीत आए। हार के बाद बसपा कार्यालय में सन्नाटा है और पार्टी कार्यकर्ता भी हैरत में है क्योंकि सपा-बसपा गठबंधन के बाद जो उत्साह उनके अंदर था, वह सब काफूर हो गया। मतगणना के बाद कुछ बसपा नेताओं ने अपना मोबाइल तक बंद रखा। बसपा को आंवला सीट हर हाल में जीतने की उम्मीद थी क्योंकि यहां मुकाबला कड़ा माना जा रहा था। हालांकि मतगणना में बसपा प्रत्याशी को करारी हार मिली। बसपा जिलाध्यक्ष राजेश सागर का कहना है कि पार्टी ने आंवला में बेहतर प्रदर्शन किया। मगर ईवीएम में गड़बड़ी के चलते चुनाव में हार मिली। संगठन की कुछ कमियां भी हो सकती हैं, लेकिन पूरी ताकत से चुनाव लड़ाया गया। मुख्य बात ईवीएम की थी, जिसमें भाजपा के वोट निकल रहे थे। बाहरी प्रत्याशी होने का मतदाताओं पर असर नहीं था। भविष्य में बसपा कार्यकर्ता फिर जनता के बीच जाएंगे और मेहनत करेंगे।