बरेली। भाजपा मोदी की प्रचंड लहर में जिस मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही थी, उसके बावजूद उसके गढ़ में विपक्ष सेंध नहीं लगा पाया। मोदी के नाम पर भाजपा का पूरा वोट एकजुट रहा। इसके उलट सपा-बसपा गठबंधन जिस वोट बैंक के बल पर चुनाव जीतने की उम्मीद लगाए बैठे थे वह वोट या तो पूरा पड़ा नहीं या फिर जो पड़ा भी वह कांग्रेस और दूसरे दलों में बंट गया।
शहर में बांके की छावनी, हार्टमन कॉलेज, गुलाबराय इंटर कॉलेज, बृजभूषण लाल पब्लिक स्कूल, द्रौपदी कन्या इंटर कॉलेज जटवारा, साहूकारा, बजरिया पूरनमल, कोहाड़ापीर के दो बूथ, आलमगिरीगंज, पुरानी कोतवाली, कला केंद्र बालिका इंटर कॉलेज, मनोहर भूषण इंटर कॉलेज, सूरजभान पब्लिक स्कूल राजेंद्र नगर, सरस्वती विद्यामंदिर प्रेमनगर, वुडरो सीनियर सेकेंडरी स्कूल राजेंद्र नगर, बांके बिहारी कम्यूनिटी हाल राजेंद्र नगर, महावीर प्रसाद कन्या इंटर कॉलेज भूड़, रघुवीर सहाय इंटर कॉलेज भूड़, रिखी सिंह गर्ल्स इंटर कॉलेज शहदाना, सूरजभान विद्या मंदिर ब्रम्हपुरा, गुरु गोविंद सिंह इंटर कॉलेज के अलावा कैंट में बेनीपुर चौधरी, रविंद्र नगर, शांति विहार, सिठौरा, सनैया धन सिंह, आरएन टैगोर इंटर कॉलेज, रेलवे मनोरंजन सदन, प्राइमरी पाठशाला जसोली, संगीत कला केंद्र कुंवरपुर, सरस्वती शिशु मंदिर नेकपुर, स्वदेश भूषण इंटर कॉलेज नेकपुर, नलकूप खंड दफ्तर मढ़ीनाथ, आर्य पुत्री कन्या इंटर कॉलेज, रेलवे हायर सेकेंडरी स्कूल सुभाष नगर, गुरुनानक खालसा सुभाष नगर जैसे भाजपा के गढ़ों में मतदाताओं ने मोदी के नाम पर एकजुट होकर भाजपा के पक्ष में वोट डाले। इसमें किसी तरह वोटों का विभाजन नहीं हो पाया। इसके विपरीत सपा-बसपा गठबंधन के गढ़ समझे जाने वाले इलाके किला, पुराना शहर, बिहारीपुर, परतापुर चौधरी, परतापुर जीवन सहाय जैसे मुस्लिम, दलित और यादव बहुल इलाकों में भाजपा भी सपा के गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब रही।
भाजपा की जीत में एक नेताजी को छोड़कर, जहां पूरी पार्टी के जिला और महानगर संगठन पदाधिकारी, शहर विधायक से लेकर बाकी विधायकों के अलावा बाकी पार्टी नेता एकजुट होकर चुनाव लड़ा रहे थे। वहीं सपा का जिला और महानगर संगठन पहले से ही भंग चल रहा था। भंग संगठन वाले नेताओं ने अपनी जिम्मेदारी प्रत्याशी के कैंप कार्यालय जाकर सिर्फ चेहरा दिखाने तक ही समझी। दो पूर्व विधायकों के अलावा दो पूर्व मंत्री कहीं भी पूरे चुनाव तक नहीं दिखे। जिला और महानगर पदाधिकारी तो अपना ही बूथ हार गए। सपा में बड़े नेताओं ने जितना हो सकता था उतना भितरघात किया। यहां तक बहुतों ने तो भाजपा के पक्ष में वोट भी डलवा दिए। यह बात ऑडियो वायरल होने से लेकर तमाम मौकों पर सामने भी आ चुकी है।