बरेली। चुनाव से पहले लोकसभा की दोनों सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन की जीत का दम भरने वाले समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव दोनों सीटें जिताना तो दूर, अपने ही बूथ पर गठबंधन को जीतने लायक वोट नहीं दिला पाए। उनके गांव के बूथ पर बसपा प्रत्याशी रुचिवीरा को 67 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
शुभलेश यादव का गांव परातासपुर आंवला लोकसभा क्षेत्र में होने के बावजूद बरेली शहर से थोड़ी ही दूरी पर है। उनके गांव के बूथ नंबर 60 पर भाजपा को 430 और बसपा को 363 वोट मिले। कांग्रेस को यहां 15 वोट मिले। लोकसभा चुनाव में मतगणना होने से पहले तक पूर्व सपा जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव दोनों सीटें और बरेली मंडल की पांचों सीटें गठबंधन के जीतने का दावा करते रहे। वहीं मतगणना के बाद जो नतीजे सामने आए तो उसमें पूर्व सपा जिलाध्यक्ष के गांव के बूथ पर भी भाजपा गठबंधन प्रत्याशी को हराती दिखी। भाजपा को शुभलेश यादव के गांव परातासपुर में बूथ नंबर 60 पर 67 वोट बसपा से ज्यादा मिले हैं। आंवला से एक बार तो ऐसी खबर भी उड़ी कि मंच पर सपा नेताओं को बैठने तक की जगह नहीं मिली। उससे सपा के अधिकांश वरिष्ठ नेता नाराज बताए गए। मगर जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बरेली और देवचरा की रैली में अपनी पार्टी के वोट बसपा को और मायावती ने बसपा के कैडर वोट सपा को ट्रांसफर करने की अपील की तो लगा कि दोनों दलों के वोटर भी एक दूसरे को सपोर्ट करेंगे। मगर गठबंधन का पूरा वोट एक दूसरे दलों को ट्रांसफर नहीं हो पाया। बसपा प्रत्याशी के हारने की यही मुख्य वजह बनी। अपना बूथ हारने के संबंध में जब पूर्व जिलाध्यक्ष से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन स्विच ऑफ था।