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पहले ठेकेदारी प्रथा खत्म की, अब विकास करेंगे

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बरेली। आंवला से धर्मेंद्र कश्यप दोबारा सांसद चुने गए हैं। धर्मेंद्र कश्यप ने बसपा-सपा गठबंधन की रुचिवीरा को बड़े अंतर से हराया है। हालांकि चुनाव से पहले बसपा प्रत्याशी एक बड़ी चुनौती लग रही थीं, लेकिन सांसद धर्मेंद्र कश्यप का मानना है कि बसपा या सपा उनको कभी चुनौती नहीं लगी। लोग मानते थे उनको चुनौती, लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं से साफ कह दिया था कि वह एक लाख से ज्यादा वोटों से जीतेंगे। प्रस्तुत है सांसद धर्मेंद्र कश्यप से अमर उजाला की क्षेत्र से जुड़े विकास और राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत-
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सवाल: सपा-बसपा गठबंधन की कड़ी चुनौती थी? फिर भी आप जीते, इसकी क्या वजह मानते हैं?
जवाब : हमें कभी भी सपा-बसपा गठबंधन चुनौती नहीं लगा। गठबंधन सिर्फ नेताओं में था। जनता में नहीं था। जनता पहले से ही मोदी के साथ थी। आंवला में वोटों का गणित देखिए। भाजपा के पक्ष में छह लाख से ज्यादा वोटर थे। हम 51 परसेंट की लड़ाई लड़ रहे थे। हमें पता था कि लीड एक लाख से कम की नहीं होगी। जीत उससे ज्यादा वोटों से हुई।
सवाल : जीत का आधार आप मोदी जी को मानते हैं या खुद को?
जवाब : हम क्या? जितने भी प्रत्याशी जीते हैं, उनकी जीत का आधार मोदी ही हैं। सब जीते हुए सांसद यही बात मानते हैं। मोदी के नाम पर केवल हमें ही नहीं बल्कि सबको ही जीत मिली है। इसमें किसी तरह का संदेह नहीं है। मोदी सरकार में पांच साल में किसी भी नेता पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे। बिना भेदभाव विकास किया गया। न जाति, न धर्म। शौचालय मिले तो सबको। आवास मिले तो सबको।
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सवाल : चुनावी जनसभा में मोदी ने प्रत्याशी का नाम नहीं लिया?
जवाब : प्रधानमंत्री की चुनावी जनसभा जरूर मेरी लोकसभा क्षेत्र में थी, लेकिन वह मंडल भर के प्रत्याशियों की थी। प्रधानमंत्री के पास वैसे भी इतना समय कहां होता है कि वह पांचों प्रत्याशियों के नाम मंच से लें। उन्होंने किसी का भी नाम किसी जनसभा में नहीं लिया।
सवाल: जनता ने राष्ट्रवाद के नाम पर भाजपा को वोट दिया। क्या आपके राष्ट्रवाद में ही जनता अपनी खुशहाली समझे?
जवाब : मोदी जैसा प्रधानमंत्री देश को आजादी के बाद पहली बार मिला है, जिसकी नीति और नीयत में खोट नहीं है। कोई उनकी ईमानदारी पर सवाल नहीं उठा सकता। जब राजीव गांधी ने कहा था कि वह एक रुपया विकास के लिए भेजते हैं तो गांव तक मात्र 15 पैसे ही पहुंचते हैं, लेकिन वह भ्रष्टाचार दूर नहीं कर पाए। मोदी ने ऋण माफी की तो पूरी। दलाल को पैसे नहीं देने पड़े। सब्सिडी सीधे बैंक खाते में। भ्रष्टाचार का नाम निशान नहीं। ऐसे ही तमाम योजनाएं, जिसका लाभार्थी को सीधा लाभ मिला। दलाली, कमीशनखोरी कहीं नहीं चलने दी।
सवाल : आंवला के विकास के लिए आपकी क्या योजना है?
जवाब : हमने अपने पहले कार्यकाल में ठेकेदारी प्रथा खत्म की। पहले यहां बड़े लोग गरीबों को अपना गुलाम समझते थे। अब वह प्रथा खत्म हो चुकी है। सब स्वाभिमान से रहते हैं। फरीदपुर में शुगर मिल है, लेकिन आंवला में एक शुगर मिल की जरूरत है। उसे लगवाएंगे। दातागंज में बेरोजगारी दूर करने के लिए एक फैक्ट्री लगवाने पर फोकस रहेगा। कन्या इंटर और डिग्री कॉलेज खोलेंगे, ताकि लड़कियों की पढ़ाई हो सके। बाकी क्षेत्र की जनता से विचार विमर्श करेंगे। जनता जो भी कहेगी, उन कामों को प्राथमिकता से कराया जाएगा।
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