बरेली। पिछले दिनों कम मार्क्स बताकर अपने ही विद्यालय के 34 बच्चों के एडमिशन से इंकार करने वाले सेंट मारिया गौरेटी इंटर कॉलेज का प्रशासन अब बैकफुट पर आ गया है। 25 मई को पेरेंट्स की होने वाली बैठक को निरस्त कर कॉलेज प्रशासन ने सभी बच्चों का एडमिशन कर लिया है, तो दूसरी ओर अब पेरेंट्स ने आगामी परीक्षाओं में बच्चों को कम मार्क्स देकर फेल करने की आशंका जताई है। फिलहाल, एडमिशन से खुश पेरेंट्स ने अमर उजाला को शुक्रिया कहा है।
सनद रहे कि 7 मई को आईसीएससी 10वीं का परीक्षा परिणाम घोषित हुआ था, जिसमें विद्यालय में पढ़ने वाली 34 छात्राओं के 75 फीसदी से कम मार्क्स आने पर उन्हें कॉलेज ने एडमिशन देने से ही इंकार कर दिया था। साथ ही छात्राओं के पेरेंट्स को बच्चों का एडमिशन आर्ट साइड से कराने का सुझाव भी दिया था। कम मार्क्स आने पर एडमिशन से इंकार किए जाने से बच्चे और पेरेंट्स खासा परेशान थे।
मामले की जानकारी होने पर अमर उजाला ने 14 मई को ‘दसवीं में 75 फीसदी से कम मार्क्स हैं तो ले जाओ बच्चे की टीसी’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कहीं अन्य कॉलेज भी ‘मार्क्स की रेस’ को बढ़ावा देने में शामिल न हो जाएं इसलिए इंग्लिश स्कूलों का पटल संभाल रहे अजीत सक्सेना ने सेंट मारिया गौरेटी इंटर कॉलेज को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। उधर, पेरेंट्स ने भी डीआईओएस कार्यालय पर प्रदर्शन किया तो वहीं पेरेंट्स फोरम भी समर्थन में उठ खड़ा हुआ। फजीहत होते देख कॉलेज प्रशासन बैकफुट पर आया और पिछले दिनों सभी का एडमिशन भी कर लिया। एडमिशन से खुश पेरेंट्स और छात्राओं ने अमर उजाला को ‘थैंक्यू’ कहा है।
बच्चों का एडमिशन लेने से इंकार नहीं किया था, बल्कि उनकी क्षमता के अनुसार पढ़ाई कराने का सुझाव दिया था। पेरेंट्स बच्चों के करियर को लेकर गंभीर नहीं हैं। हमारे कॉलेज के बच्चे थे इसलिए हमने एडमिशन कर लिया है।
- सिस्टर अल्फोंसा, प्रिंसिपल