बिजौरिया गांव में दो मासूम बच्चों की बुखार से मौत हो गई। राकेश बाबू के चार वर्षीय बेटे अमरोला का सीएचसी से इलाज चल रहा था। उसे बचाया नहीं जा सका। वहीं चार दिन पहले इसी गांव के वीरपाल की तीन माह की बेटी की बुखार से मौत हो गई है। दो मासूमों की सिलसिलेवार हुई मौतों से पूरा गांव दहशत में है।
वहीं फतेहगंज पूर्वी के गांव भनपुरा निवासी संतराम (55वर्ष) की भी बुखार से मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि रविवार दोपहर वह गांव में शोक आयोजन में शामिल होने गया था। वहां से लौटने पर उन्हें तेज बुखार आया। शाम करीब पांच परिजन उसे कस्बे के एक निजी चिकित्सक के पास ले गए। इससे पहले कि चिकित्सक जांच कर उन्हें दवा देते, उनकी मौत हो गई।
आंवला सीएचसी में बुखार की दवा दे रहे फॉर्मासिस्ट
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल बेहाल है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते यहां फार्मेसिस्ट सर्दी, बुखार से पीड़ित रोगियों को दवा दे रहे हैं। वैसे तो यहां एक महिला डॉक्टर सहित चार चिकित्सकों की तैनाती है, लेकिन सोमवार को दंत चिकित्सक रजनीश चंद्र और फॉर्मासिस्ट अखिलेश सक्सेना, प्रदीप कुमार रोगियों की भीड़ को समझाकर उनका उपचार करते दिखे। बताया गया कि चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर राजेंद्र कुमार जिला मुख्यालय पर मीटिंग में गए हैं, डॉ. मेधा पांडेय अवकाश पर हैं।
एक डॉक्टर मेडिकल लीव पर बताए गए। बताया गया कि कुछ समय के लिए भुता से एक चिकित्सक को संबद्ध किया गया है, लेकिन वह भी चले गए। यह हालात तब है जबकि मौजूदा समय में क्षेत्र संक्रामक रोग की चपेट में है। बता दें कि वायरल के 500 से 600 रोगी प्रतिदिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार करवाने आ रहे हैं।