बरेली। बीडीए ने जब महायोजना 2001 बनाई थी तो उसमें शहर के कुछ इलाकों को चिह्नित कर उन्हें कॉमर्शियल घोषित किया था। उस जमीन के सर्किल रेट रेजिडेंसियल एरिया के सर्किल रेट से ज्यादा थे। मगर बीडीए में तैनात रहे अफसरों, इंजीनियरों और सुपरवाइजरों समेत बाकी स्टाफ की मेहरबानी से ज्यादातर कॉमर्शियल इलाकों में अवैध इमारतों की भरमार हो गई। जमीनों पर कब्जा करके अनधिकृत व्यापार भी शुरू कर दिए गए। अब बीडीए के लिए यह जमीन कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए खाली करा पाना संभव नहीं रह गया । इससे प्राधिकरण के साथ नगर निगम को भी हर साल करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
मास्टर प्लान के मुताबिक इज्जतनगर रेलवे क्रॉसिंग के निकट 99 हेक्टेयर जमीन पर नगर केंद्र प्रस्तावित था जोखुल नहीं पाया। इस वजह से आसपास का विकास अवरुद्ध हो गया। इसके अलावा बदायूं रोड, पीलीभीत बाईपास और पीलीभीत मार्ग के बीच में दो व्यावसायिक केंद्र खोलने के लिए 19-19 यानी 39 हेक्टेयर जमीन प्रस्तावित थी। जिला अस्पताल को भी स्थानांतरित कर यहीं लाया जाना था।
पीलीभीत बाईपास पर प्रस्तावित जिला अस्पताल के आसपास व्यावसायिक गतिविधियाें के लिए छह हेक्टेयर जमीन अलग प्रस्तावित थी मगर यह सब भी किनारे हो गया। पीलीभीत बाईपास रोड अवैध कामर्शियल भवनों से पट गया। इसी तरह मानसिक चिकित्सालय की और जिला जेल की जमीन जो क्रमश: 4 और 7 हेक्टेयर थी, वह भी व्यावसायिक भू-उपयोग के लिए प्रस्तावित थी। नगरीय निर्मित क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को देखते हुए मास्टर प्लान में शहर के अलग-अलग हिस्सों से कुल 308 हेक्टेयर जमीन कॉमर्शियल प्रस्तावित थी। इसको 19 हिस्सों में विभाजित किया गया था। इन मार्गों में अधिकांश को बाजार स्ट्रीट के अंतर्गत रखा गया। बीडीए ने खुद ही स्वीकार किया कि मास्टर प्लान की प्रस्तावित व्यावसायिक जमीन पर उस तरह के निर्माण नहीं हो पाए जिस तरह की प्लानिंग थी।
भू-उपयोग प्रस्तावों के विपरीत शहर के मुख्य मार्गोँ पर पट्टीनुमा व्यावसायिक जमीन पर वर्तमान में अवैध व्यापार संचालित हो रहा है या फिर अधिकांश कारोबारियों ने आवासीय नक्शे स्वीकृत कराकर कॉमर्शियल गतिविधियां संचालित कर रखी हैं। भवनों में सेट बैक, फ्रंट, पार्किंग के नियमों का कहीं भी पालन नहीं होता। वाहन सड़क पर खड़े होते हैं, जिससे आम नागरिकों को जाम का सामना करना पड़ता है। यातायात अवरुद्ध रहता है।
मास्टर प्लान 2021 में शहर को बसाने की जो योजना थी, उसका पालन नहीं हो पाया। अब नया मास्टर तैयार किया जा रहा है। उसमें सेटेलाइट सर्वे से सब कुछ चिन्हित किया जाएगा। जो चीजें पुराने मास्टर प्लान में रह गई थी,ं उनको नए मास्टर प्लान में शामिल किया जाएगा। - आशीष शिवपुरी, चीफ टाउन प्लानर