बरेली। 23 अप्रैल को बरेली और आंवला लोकसभा सीट के लिए 3427 पोलिंग बूथों पर मतदान कराने के लिए सभी पोलिंग पार्टियां सोमवार को नरियावल मंडी से रवाना हो गई। हालांकि इन पोलिंग पार्टियों को सुबह नौ से दस बजे से रवाना शुरू होना था लेकिन ईवीएम और वीवीपैट लेने के लिए औपचारिकता पूरा करने में कर्मचारी घंटों इधर से उधर भटकते रहे। इस वजह से उन्हें मतदान केंद्रों पर पहुंचने में काफी विलंब हो गया। दोपहर दो बजे से पोलिंग पार्टियों की रवानगी शुरू हुई जो शाम छह बजे चलती रही।
प्रशासन ने पोलिंग पार्टियों को बूथों पर रवाना करने के लिए टीपीनगर नरियावल मंडी में व्यवस्था कराई थी। यहां से 1910 मतदान केंद्रों पर बने 3427 बूथों पर पोलिंग पार्टियों को सुबह नौ व दस बजे से रवाना होना था। मतदान पार्टियों में शामिल करीब 14 हजार कर्मचारियों को उनके बूथों पर ले जाने के लिए 769 बसों के इंतजाम टीपीनगर में कराए गए थे। इनके लिए नरियावल मंडी परिसर में ही विधानसभावार कैंप लगे थे। यहां कर्मचारियों के लिए असुविधा यह रही कि ड्यूटी हस्ताक्षर करने के लिए उन्हें लंबी लाइन लगानी पड़ी। इसके बाद ईवीएम और वीवीपैट लेने के लिए भी उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। ऐसे में टीपीनगर से पोलिंग पार्टियां दोपहर करीब दो बजे से रवाना होना शुरू हो सकीं। यह सिलसिला शाम करीब छह बजे तक चलता रहा। पोलिंग पार्टियों के देर से निकलने से मीरगंज, आंवला सहित कई जगहों पर पहुंचने में उन्हें काफी देरी हो गई। कुुछ जगहों पर बसों के खराब होने की सूचना भी आईं। इसमें क्योलड़िया जाने वाली बस के नवाबगंज के पास खराब होे जाने की सूचना आई तो उसकी जगह पर दूसरी बस का इंतजाम कराया गया। दस प्रतिशत कर्मचारियों का रिजर्व में रखा गया है।
नेटवर्क फेल हो जाने से एक-दूसरे को तलाशती रही पोलिंग पार्टियां
चुनाव ड्यूटी में लगे हजारों कर्मचारियों के नरियावल मंडी में पहुंच जाने के बाद यहां मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क फेल हो गए। ऐसे में भीड़ में मतदान पार्टियां एक-दूसरे के संपर्क में नहीं आ सकी। इससे उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ीं। इससे भी पोलिंग पार्टियों को रवाना होने में विलंब हुआ।
मतदान केंद्रों पर जाने से पहले तक होती रही ड्यूटी कटवाने की मशक्कत
इलेक्शन से ड्यूटी कटवाने के लिए कर्मचारी कई दिनों से चक्कर काट रहे थे। सोमवार को नरियावल मंडी में भी बड़ी संख्या में कर्मचारी चुनावी ड्यूटी कटवाने के लिए मशक्कत करते रहे। कर्मचारियों ने अपनी बीमारी या अपने किसी परिवार के सदस्य के गंभीर बीमारी होने का हवाला दिया तो तमाम कर्मचारियों ने परिवार से संबंधित तमाम दूसरी दिक्कतों का भी हवाला दिया।
गर्मी से बेहाल कर्मचारियों को झेलनी पड़ी पीने के पानी की दिक्कत
नरियावल मंडी में कर्मचारियों को पीने के पानी का इंतजाम नाकाफी साबित हुआ। इसे तेज धूप में महिला कर्मचारी और उनके साथ बच्चों के गले सूखते रहे। कई बार अधिकारियों को एफएसडीए के स्टाफ को निर्देश देकर पानी का इंतजाम कराना पड़ा।