बरेली। कुतुबे आलम औलाद-ए-मौला अली हजरत शाह नियाज कादरी के उर्स के मौके पर खानकाह वामिकिया निशातिया में महफिल हुई। इसमें मीलाद और तकरीर के बाद नजर पेश की गई।
इस मौके पर नायब सज्जादानशीन मौलाना सैयद असलम मियां वामिकी ने हजरत शाह नियाज अहमद की जिंदगी पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि हजरत शाह नियाज किसी एक खानकाह या सिलसिले के ही बुजुर्ग नहीं हैं। बर्रे सगीर और मुल्क की सभी बड़ी खानकाहे मसलन अजमेर शरीफ, दिल्ली से लेकर रामपुर, भैसोड़ी व दूसरे मुल्क की तमाम खानकाहों के उर्स में महफिले समा के दौरान हजरत शाह नियाज के रूहानी कलाम पढ़े और सुने जाते हैं। उन्होंने कहा कि तमाम उलमा और मशाइख अहले सुन्नत हजरत शाह नियाज का अदब व एहतराम दिल की गहराइयों से करते हैं। मरकजे अहले सुन्नत बरेली में मदारिस रूहानी खानकाहों में काम चल रहा है। आप बरेली में सबसे पहली खानकाह व मदरसे के संस्थापक हैं। आप की आमद से पहले बरेली में न कोई खानकाह थी न कोई मदरसा। आखिर में हजरत शाह नियाज की नजर पेश की गई और वामिकी लंगर हुआ। साहिबे सज्जादा पीरे तरीकत सैयद मोहम्मद मियां वामिकी ने मुल्क में अमन-ओ-सलामती की दुआ की। इस दौरान डॉ. महमूद हुसैन, मास्टर गुलाम साबिर, हाजी नबी हसन वामिकी, कारी अलाउद्दीन वामिकी, सैयद जीशान वामिकी, मास्टर नसीर वामिकी, नवाब अयाज वामिकी आदि मौजूद रहे।