70 रुपये वाली अरहर की दाल में 30 रुपये वाली घातक खेसारी की मिलावट की जा रही है। कारण, खेसारी हूबहू दाल जैसी होती है, जो अरहर और चना की दाल में आसानी से मिल जाती है। बेसन में भी इसका जबरदस्त इस्तेमाल हो रहा है। शासन के आदेश के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) इन दिनों ऐसे दाल कारोबारियों पर निगाह टिकाए हुए है। हाल में कई जगहों से दालों के लिए गए नमूनों को भी जांच के लिए भेजा गया है। आयुक्त के आदेश पर विभाग को यह अभियान पंद्रह दिनों तक जारी रखना है।
एफएसडीए के अधिकारियों का कहना है कि शासन में यह लगातार शिकायतें जा रहीं हैं कि अरहर और चने की दाल में खेसारी मिलाई जा रही है, जबकि खेसारी बेहद खतरनाक है, जिसे खाने से शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं। कई मामलों में तो जान जाने का भी खतरा रहता है।
व्यापारियों की मानें तो खेसारी बमुश्किल 30 रुपये प्रतिकिलो मिल जाती है, जबकि इसे अरहर या चने में मिलाने से इसके रेट दोगुने से भी अधिक हो जाते हैं। एफएसडीए के अधिकारियों का कहना है कि दालों में इसे मिलाने पर जांच में इसका खुलासा हो जाता है, लेकिन अगर इसकी पिसाई बेसन बनाने के लिए हो जाए तो इसे पकड़ पाना काफी कठिन होता है। हाल में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने आयुक्त के आदेश के बाद खेसारी से मिलावट की आशंका को लेकर कालीबाड़ी, बल्लिया (आंवला), रिछौला (नवाबगंज) के कई दुकानदारों के यहां छापामार नमूने जांच को भेजे जा चुके हैं।
खेसारी दाल से मिलावट करने की शिकायत मिलने के बाद दाल विक्रेताओं के यहां से नमूने भरे जा रहे हैं। आयुक्त के सख्त निर्देश हैं। ये कार्रवाई अभी आगे भी चलेगी। - वीरेंद्र द्विवेदी, प्रभारी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
सिंथेटिक दूध की आशंका के मद्देनजर भरे सैंपल
एफएसडीए की टीम ने दूध विक्रेता बिशारतगंज के जितौरा निवासी राधेश्याम पुत्र चुन्नीलाल, भमौरा के कैमुआ मजनूपुर निवासी जाकिर पुत्र अफसर, आंवला के मडौरा के गांव सतारनगर निवासी महेंद्रनाथ और भमौरा थाने के ब्रह्मपुर के ओमपाल से नमूने एकत्र किए हैं। टीम ने यह सभी सैंपल चौपुला चौराहे पर चेकिंग के दौरान भरे हैं।