लाल फाटक पर बन रहे फोरलेन ओवरब्रिज के निर्माण में काम आने वाली सेना की जमीन के बदले प्रशासन डेढ़ गुनी भूमि उपलब्ध कराएगा। प्रशासन ने बभिया में जगह भी दिखा दी है। सेना के अफसरों ने जमीन का स्थलीय निरीक्षण करने बाद उस पर सहमति जता दी है लेकिन इसका फैसला फिलहाल रक्षा मंत्रालाय ही करेगा। प्रशासन के सहमति पत्र के साथ स्थानीय सैन्य अफसर मसौदे को रक्षा मंत्रालय और सैन्य मुख्यालय भेजेंगे। इसके बाद ही ही लाल फाटक ओवरब्रिज के निर्माण में आ रही बाधा दूर हो जाएगी।
बता दें कि लाल फाटक रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में सेना की एनओसी मिलना बड़ी बाधा है। इसके न मिलने से निर्माण कार्य अधर में लटक ा हुआ है। दरअसल, रक्षा मंत्रालय ने ओवरब्रिज के लिए सैन्य क्षेत्र की जमीन देने के बदले उतनी ही कीमत जमीन मांगी थी। इस पर प्रशासन ने जमीन की तलाश शुरू कर दी। प्रशासन को जाट रेजीमेंट सेंटर से लगे गांव बभिया में जमीन मिल गई। अफसरों ने बभिया में जमीन चिह्नित करने के बाद रक्षा संपदा अधिकारी के प्रतिनिधि के सामने जमीन की पैमाइश करा दी।
जमीन की कीमत रहे बराबर
रक्षा मंत्रालय की शर्त के अनुसार प्रशासन को लाल फाटक पर ओवरब्रिज के निर्माण के लिए सेना की जमीन की कीमत के बराबर ही जमीन मुहैया कराने पर ही एनओसी मिलेगी। बभिया में सेना को दी जा रही जमीन ओवर ब्रिज के लिए ली जा रही जमीन की डेढ़ गुनी है। दरअसल, लाल फाटक पर सेना की 6520 वर्गमीटर जमीन की कीमत करीब 7,25,13,409 रुपये है, जबकि इतने रुपये में बभिया में 9700 वर्गमीटर जमीन मिल जाएगी।
बभिया में जमीन की पैमाइश
पिछले दिनों जमीन की पैमाइश के लिए प्रशासन, सेतु निगम और रक्षा संपदा विभाग की टीम बभिया गांव पहुंची थी। यहां 9700 वर्गमीटर जमीन चिह्नित की गई है। रक्षा संपदा विभाग के एसडीओ महेश बिष्ट ने जमीन से संबंधित कागजात उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन से कहा है। इस दौरान लेखपाल प्रेमपाल गंगवार, मुनीष चंद्र मिश्र, सेतु निगम के एई एके सिंह के अलावा बभिया के प्रधान मौजूद रहे।
किसकी कितनी है जमीन
कैंटोनमेंट बोर्ड की 5010.6 वर्गमीटर
मिलिट्री फार्म की 1510.29 वर्गमीटर
प्रशासन ने बभिया में जमीन दिखाई है। जमीन के वर्तमान मूल्य समेत अन्य कागजात मांगे हैं। जमीन लेने का प्रस्ताव बोर्ड में रखा जाएगा। प्रस्ताव पास होने पर ही जमीन ली जाएगी। - प्रमोद कुमार सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी
सेना को जमीन के बदले जमीन देने के लिए बभिया में जमीन चिह्नित कराई गई है। कैंट बोर्ड से प्रस्ताव पास होने के बाद रक्षामंत्रालय से एनओसी मिलने की संभावना है। - एमपी सिंह, एसडीएम सदर