एस्केलेटर का कैरिकेचर
सिग्नल अनुभाग की लापरवाही बनी एस्केलेटर लगने में रोड़ा
मुरादाबाद मंडल के आदेश को सिगनल विभाग ने हवा में उड़ाया
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। एस्केलेटर में जंग लगे या वे कबाड़ बन जाएं। तय वक्त पर लगें या न लगें, रेलवे के सिग्नल अनुभाग को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यही वजह है कि सिग्नल अनुभाग के अधिकारियों ने अब तक उस जगह सिग्नल केबल की लोकेशन चेक नहीं की है, जहां एस्केलेटर लगने हैं, जबकि मुरादाबाद मंडल मुख्यालय से दो दिन पहले ही रेलवे जंक्शन के अधिकारियों से इस बाबत रिपोर्ट मांगी जा चुका है।
मुरादाबाद डिवीजन के निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर ने 11 अप्रैल को रेलवे जंक्शन के सिग्नल अनुभाग को पत्र भेजा था। इसमें एस्केलेटर लगने से पहले सिग्नल केबल की लोकेशन चेक करने के आदेश दिए थे, ताकि एस्केलेटर लगाने के लिए खुदाई कराते वक्त केबल न कट जाएं। सिग्नल केबल 12 अप्रैल को चेक करके इसकी रिपोर्ट निर्माण विभाग को भेजनी थी, लेकिन अधिकारियों ने अब तक केबल की लोकेशन चेक नहीं की है। इससे एस्केलेटर लगाने का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस बाबत पूछने पर सिग्नल अनुभाग के अधिकारियों ने कहा कि केबल की लोकेशन चेक करना कौन सा बड़ा काम है, कर लेंगे। बता दें कि जंक्शन पर लगने के लिए आए एस्केलेटर डेढ़ साल से पड़े कबाड़ हो पहे हैं। पांच अप्रैल को जब केंद्रीय राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने रेल मंत्री पीयूष गोयल के सामने यह मामला उठाया तब एस्केलेटर लगाने की प्रक्रिया में तेजी आई, लेकिन सिग्नल अनुभाग ने इसमें ब्रेक लगा दिया।