सीडीओ-सीवीओ के पत्रों की भी अनदेखी
दस जून को मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. मनमोहन पांडेय ने डीएम को पत्र लिखकर बताया कि गो-आश्रय स्थलों के लिए संबंधित फर्म से भूसा खरीदने एवं बकाया भुगतान की कार्रवाई बीडीओ को करनी है। इसके लिए बीडीओ को उन्होंने तीन और सीडीओ ने सात पत्र लिखे। बीडीओ ने मौखिक रूप से बताया कि नामित फर्म के संचालक ने जिन गोशालाओं में भूसा दिया है, उसमें मिट्टी और मोटा भूसा पाया गया है। इस कारण गोशाला संचालकों ने फर्म से भूसा नहीं खरीदा और स्थानीय बाजार से कम दर पर क्रय किया है।
9,199 गोवंश के चारे में खेल
जिले की 102 गोशालाओं में 9,199 गोवंश संरक्षित हैं। इन गोशालाओं में नामित फर्म एमएस इंटरप्राइजेज, परसाखेड़ा से भूसा लेने के आदेश हैं। 24 जुलाई 2024 को ई-टेंडरिंग के जरिये इस फर्म का चयन किया गया था। फर्म स्वामी मनोज शर्मा ने बताया कि 75 गोशालाओं ने इस फर्म से भूसा नहीं खरीदा। जिन गोशालाओं ने एक-दो बार लिया भी, उन्होंने भुगतान अटका दिया। फर्म मालिक का 75.62 लाख रुपये बकाया है।
डीएम के सवाल पर बीडीओ ने साधी चुप्पी
खबर है कि बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में डीएम की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन व समीक्षा समिति की बैठक में यह मामला सुर्खियों में रहा। डीएम ने मौजूद बीडीओ से सवाल दागे। बहेड़ी बीडीओ आशीष ने सफाई दी कि फर्म गुणवत्ताविहीन भूसा दे रही थी, इसलिए नहीं लिया गया। डीएम ने सवाल किया कि स्थानीय बाजार से भूसे की खरीदारी किसकी अनुमति से की गई? इस पर सभी बीडीओ चुप्पी साध गए।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनमोहन पांडेय ने बताया कि नामित फर्म से इतर भूसे की खरीदारी के लिए बीडीओ को सक्षम अधिकारी से अनुमति लेनी चाहिए थी, लेकिन कुछ बीडीओ ने अनुमति नहीं ली है। हमने बीडीओ को ऐसा करने से रोकने का बहुत प्रयास किया। कई पत्र लिखे, लेकिन वह अनदेखी करते रहे। अब प्रकरण सामने आने पर उच्चाधिकारियों ने सख्ती बढ़ाई है। बीडीओ से जवाब तलब किया गया है।