बांकेगंज। भूगर्भ जलस्तर यदि इसी तरह गिरता रहा तो आने वाले दिनों पानी की गंभीर समस्या से जूझना होगा। बांकेगंज में वर्ष 2011 से लगातार जल स्तर नीचे गिर रहा है। इस वक्त भूगर्भ जल स्तर सामान्य से 4.35 मीटर नीचे है। इलाके ताल तलैय्या अपने अस्तित्व से जूझ रहे हैं। नगरिया झील सूखी है। पशु पक्षियों को पानी का संकट है।
फसलों की सिंचाई के लिए लगे पंपिंगसेट से पानी काफी कम निकलने लगा है। किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। भूगर्भ जलस्तर नीचे गिरने से क्षेत्र में लगे हैंडपंपों से भी पानी आना कम हो गया है। बांकेगंज क्षेत्र में सामान्य भूगर्भ जलस्तर सात मीटर की गहराई तक होना चाहिए। जबकि लगातार इसमें गिरावट आ रही है। वर्ष 2011 में बारिश के पहले भूगर्भ जलस्तर सामान्य से 02.87 मीटर नीचे था, जो 2013 में गिरकर 3.20 मीटर नीचे चला गया। 2014 में जलस्तर और गिरा और यह 03.7 मीटर नीचे पहुंच गया। 2015 में 04.05, 2016 में 04.32 तो 2017 यह जलस्तर 04.40 मीटर नीचे पहुंच गया, 2018 में 4.55 रह गया। जबकि मौजूद समय में जलस्तर सामान्य से करीब 4.35 मीटर नीचे आंका जा रहा है। भूगर्भ जलस्तर में लगातार यह गिरावट क्षेत्र में आने वाले समय में पानी के संकट का संकेत दे रही है।
बांकेगंज क्षेत्र में अलीगंज, संसारपुर, कोठीपुर, वजीर नगर, अर्जुनपुर, कुकरा, मैलानी, रोशननगर आदि 14 जगहों पर भूगर्भ जलस्तर मापने के यंत्र लगे हैं, जिनके मापन के अनुसार मिले परिणामों के मुताबिक पूरे ब्लॉक क्षेत्र में साल दर साल भूगर्भ जलस्तर में गिरावट आ रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन जंगल से होकर निकलने वाला बरौंछा नाला हमेशा पानी से भरा रहता था। इस नाले में इस साल बहुत कम पानी रह गया है। महुरेना बीट में नगरिया झील भी पानी से लबालब रहती थी, पिछले कई वर्षों से गर्मी के मौसम में यह झील सूखकर मैदान बन जाती है। गांवों में खोदवाए गए आदर्श और प्राकृतिक तालाब भी पूरी तरह सूख गए हैं।
बांकेगंज ब्लॉक क्षेत्र में सामान्य भूगर्भ जलस्तर सात मीटर नीचे होना चाहिए, जबकि लगातर इसमें गिरावट आ रही है। पानी की एक-एक बूंद कीमती है।
- अनुपम श्रीवास्तव, एक्सईएन, ग्राउंड वाटर।