बरेली। अष्टमी युक्त नवमी तिथि होने से शनिवार को घरों में सुबह मां महागौरी और शाम को मां सिद्धिदात्री का पूजन होगा। परंपरा के अनुसार कुछ घरों में दोपहर में कन्याएं जिमाई जाएंगी, तो कहीं दशमी तिथि पर मां का विधि विधान से पूजन कर व्रत परायण किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सुबह अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि का मान होने से परंपरानुसार वैष्णव मतावलंबी हवन पूजन कर कन्या जिमाएंगे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. नीरज शर्मा और डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि दोपहर में नवमी का मान होने से सुबह ही मां सिद्धिदात्री का पूजन शास्त्रोचित नहीं माना जाएगा। तमाम शुभ संयोगों के साथ बन रही अष्टमी और नवमी पर विधि विधान के साथ पूजन किया जाना श्रेयस्कर रहेगा। हालांकि व्रत का परायण श्रद्धालु 14 अप्रैल को सूर्योदय के बाद करें तो श्रेयस्कर रहेगा। उनके मुताबिक जातकों को सुबह विधि विधान से मां महागौरी का पूजन करना चाहिए। दोपहर बाद मध्याह्न काल की मान्यता होने से नवमी के सारे अनुष्ठान दोपहर बाद शुरू किए जा सकते हैं। ऐसे में उन्होंने दोपहर बाद हवन-पूजन, आरती समेत अन्य कार्य परंपरानुसार संपन्न किए जाने की बात कही है।
सूर्योदय के साथ करें व्रत परायण
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार व्रत परायण को लेकर शुक्रवार को दिन भर फोन घनघनाते रहे। प्रथमा और अष्टमी का व्रत करने वाले जातकों ने सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि यानी 12 अप्रैल को व्रत कर मां की आराधना की और 13 की सूर्योदय में वह व्रत परायण कर सकते हैं। इसी तरह नौ दिनों का व्रत करने वाले जातकों के लिए अष्टमी युक्त नवमी तिथि होने से दशमी को सूर्योदय होने पर व्रत परायण करना चाहिए। बताया कि धर्म शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय का मान सर्वोत्तम माना गया है। नवमी मध्याह्न काल में लग रही है। इसलिए धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जा सकते हैं लेकिन व्रत का परायण दशमी तिथि पर किया जाना श्रेयस्कर रहेगा।
सप्तमी पर मां कालरात्रि की हुई आराधना
बरेली। नवरात्र की सप्तमी यानी शुक्रवार को मां कालरात्रि के दर्शन पूजन के लिए मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्त उमड़ते रहे। विधि विधान से मां के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली के लिए मनोकामना की। दोपहर में मंदिरों में महिला मंडली ने छंद कीर्तन और भजन गाकर माहौल को भक्तिरस से सराबोर किया।
किला के साहूकारा स्थित नौ देवी दुर्गा मंदिर में दोपहर में महाआरती का आयोजन हुआ। महाआरती में महिलाओं ने छंद गाकर मां की महिमा का गुणगान किया। महंत किशोर योगी ने बताया कि महाआरती के बाद करीब तीन हजार से अधिक महिलाओं को अंगवस्त्र और श्रृंगार का सामान मंदिर कमेटी की ओर से भेंट किया गया। इस दौरान माता के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। वहीं, सुभाषनगर स्थित हरे राम नवदुर्गा मंदिर में सुबह देवी कालरात्रि का पूजन किया गया। दोपहर में संस्था की महिला प्रकोष्ठ की महिला मंडली ने छंद और कीर्तन गाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया। वहीं, कालीबाड़ी स्थित मां काली के मंदिर में सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा। इसके अलावा चौरासी घंटा मंदिर, जनकपुरी स्थित श्री शिव शक्ति मंदिर, मां वैष्णो देवी मनोकामना मंदिर समेत अन्य देवी मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित हुए। आज घरों मेें जिमाई जाएंगी कन्या कल होगा व्रत परायण
अष्टमी युक्त नवमी तिथि होने से श्रद्धालु एक साथ करेंगे दोनों अनुष्ठान
बरेली। अष्टमी युक्त नवमी तिथि होने से शनिवार को घरों में सुबह मां महागौरी और शाम को मां सिद्धिदात्री का पूजन होगा। परंपरा के अनुसार कुछ घरों में दोपहर में कन्या जिमाई जाएंगी तो कहीं दशमी तिथि पर मां का विधि विधान से पूजन कर व्रत परायण किया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक सुबह अष्टमी और दोपहर में नवमी तिथि का मान होने से परंपरानुसार वैष्णव मतावलंबी हवन पूजन कर कन्या जिमाएंगे।
ज्योतिषाचार्य डॉ. नीरज शर्मा और डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि दोपहर में नवमी का मान होने से सुबह ही मां सिद्धिदात्री का पूजन शास्त्रोचित नहीं माना जाएगा। तमाम शुभ संयोगों के साथ बन रही अष्टमी और नवमी पर विधि विधान के साथ पूजन किया जाना श्रेयस्कर रहेगा। हालांकि, व्रत का परायण श्रद्धालु 14 अप्रैल को सूर्योदय के बाद करें तो श्रेयस्कर रहेगा। उनके मुताबिक जातकों को सुबह विधि विधान से मां महागौरी का पूजन करना चाहिए। दोपहर बाद मध्याह्न काल की मान्यता होने से नवमी के सारे अनुष्ठान दोपहर बाद शुरू किए जा सकते हैं। ऐसे में उन्होंने दोपहर बाद हवन-पूजन, आरती समेत अन्य कार्य परंपरानुसार संपन्न किए जाने की बात कही है।
सूर्योदय के साथ करें व्रत परायण
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार व्रत परायण को लेकर शुक्रवार को दिन भर फोन घनघनाते रहे। प्रथमा और अष्टमी का व्रत करने वाले जातकों ने सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि यानी 12 अप्रैल को व्रत कर मां की आराधना की और 13 की सूर्योदय में वह व्रत परायण कर सकते हैं। इसी तरह नौ दिनों का व्रत करने वाले जातकों के लिए अष्टमी युक्त नवमी तिथि होने से दशमी को सूर्योदय होने पर व्रत परायण करना चाहिए। बताया कि धर्म शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय का मान सर्वोत्तम माना गया है। नवमी मध्याह्न काल में लग रही है। इसलिए धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जा सकते हैं लेकिन व्रत का परायण दशमी तिथि पर किया जाना श्रेयस्कर रहेगा।
सप्तमी पर मां कालरात्रि की हुई आराधना
बरेली। नवरात्र की सप्तमी यानी शुक्रवार को मां कालरात्रि के दर्शन पूजन के लिए मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्त उमड़ते रहे। विधि विधान से मां के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने परिवार की खुशहाली के लिए मनोकामना की। दोपहर में मंदिरों में महिला मंडली ने छंद कीर्तन और भजन गाकर माहौल को भक्तिरस से सराबोर किया।
किला के साहूकारा स्थित नौ देवी दुर्गा मंदिर में दोपहर में महाआरती का आयोजन हुआ। महाआरती में महिलाओं ने छंद गाकर मां की महिमा का गुणगान किया। महंत किशोर योगी ने बताया कि महाआरती के बाद करीब तीन हजार से अधिक महिलाओं को अंगवस्त्र और श्रृंगार का सामान मंदिर कमेटी की ओर से भेंट किया गया। इस दौरान माता के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। वहीं, सुभाषनगर स्थित हरे राम नवदुर्गा मंदिर में सुबह देवी कालरात्रि का पूजन किया गया। दोपहर में संस्था की महिला प्रकोष्ठ की महिला मंडली ने छंद और कीर्तन गाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया। वहीं, कालीबाड़ी स्थित मां काली के मंदिर में सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा। इसके अलावा चौरासी घंटा मंदिर, जनकपुरी स्थित श्री शिव शक्ति मंदिर, मां वैष्णो देवी मनोकामना मंदिर समेत अन्य देवी मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित हुए।
श्री शक्ति सनातन व्रतोत्सव पत्रिका का विमोचन आज
सुभाष नगर स्थित ईश्वरी भवन में संस्था की ओर से श्री शक्ति सनातन व्रतोत्सव पत्रिका का विमोचन शाम पांच बजे किया जाएगा।