बरेली। टीबी रोग की रोकथाम के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बावजूद पिछले तीन सालों में ढाई हजार टीबी के नए मरीज मिले हैं। बढ़ती संख्या को रोकने के लिए अब स्वास्थ्य विभाग ने ‘प्राइवेट नोटिफिकेशन’ के तहत मरीजों को खोजने की योजना बनाई है, जिसके तहत खोजने वाले को प्रति मरीज की जानकारी देने पर पांच सौ रुपये नगद दिए जाएंगे। जिला क्षय रोग दिवस पर यह जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एसके गर्ग ने दी।
उन्होंने बताया कि लापता टीबी के मरीज झोलाछापों से अथवा निजी प्रैक्टिशनर से इलाज करा रहे हैं। ऐसे में उन्हेें निक्क्ष्य पोषण योजना के तहत एक मुश्त भुगतान का लाभ नहीं मिलेगा। जिला क्षय केंद्र में रजिस्टर्ड मरीज को ही लाभ दिए जाने का आदेश शासन ने दिया है। सोमवार को जिला क्षय रोग केंद्र में आयोजित ‘इट्स टाइम’ विषय पर आधारित कार्यक्रम में बताया गया कि टीबी की बढ़ती बीमारी को रोकने के लिए जिले में 23 टीबी यूनिट, 46 बलगम जांच केंद्र, 3 सीबीनाट मशीनें संचालित हैं। बताया कि सीबी नाट मशीन बलगम में 131 से अधिक बैक्टीरिया मिलने पर टीबी रोग की पुष्टि करती है। कार्यक्रम में हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा टीबी रोगियों की पहचान और उनके इलाज के संबंध में जारी नई गाइडलाइन की जानकारी दी गई।
मेडिकल स्टोर से मांगी जानकारी
जिला क्षय रोग अधिकारी ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर शहर और देहात क्षेत्रों के मेडिकल स्टोर संचालकों से टीबी के संभावित मरीजों की जानकारी मांगी है। उन्होंने टीबी संबंधी दवाएं लेने वालों अथवा उनमें टीबी के लक्षण दिखाई देने पर सूचना देने को कहा है। इसके एवज में उन्हें भी पांच सौ रुपये की योजना का लाभ मिलेगा। बता दें कि सरकारी कर्मियों को इंफॉरमेंट योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
योजना का लाभ लेने का तरीका
योजना के अनुसार किसी व्यक्ति में टीबी के संभावित लक्षण दिखने पर उसे जांच केंद्र भेजना होगा। जांच केंद्र में उसके बलगम की जांच की जाएगी। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर संबंधित मरीज से भेजने वाले की जानकारी मांगी जाएगी, जिसके बाद संबंधित व्यक्ति कोे 5 सौ रुपये का भुगतान होगा। सनद रहे कि टीबी रोगियों को खोजने के लिए चलाए जा रहे कैंपेन का कोई खास प्रभाव नहीं दिख रहा।