बरेली। बाजार पर होली के रंग चढ़ने लगे हैं। शहर में मिठाई और नमकीन के कारखानों में कई दिनों से किसी को सांस लेने की फुर्सत नहीं है। थोक कारोबारियों के आर्डर भी बुक हो गए हैं। होली में इस बार चुनाव का रंग भी शामिल है इसलिए पिछले साल के मुकाबले मिठाई, मावा, बेकरी और नमकीन उत्पादों की मांग भी अपेक्षाकृत ज्यादा है। इस बीच बड़ी गुझिया देखकर हाथ पीछे खींचने वालों के लिए गुझिया का छोटा साइज भी बाजार में लांच किया गया है। नए साइज की इस गुझिया की मांग भी ज्यादा है।
गुझिया चाहे बाजार से खरीदी गई हो या फिर घर में बनी हो, उसका साइज आमतौर पर एक ही होता है। होली के सीजन में कई दिनों तक आदर सत्कार के लिए गुझिया का ही इस्तेमाल होता है। अक्सर मीठे और मावे से परहेज करने वाले बड़ी गुझिया खाने से झिझकते हैं। अक्सर गुझिया आधी तोड़कर काम चलाने की कोशिश होती है। ऐसे ही लोगों के लिए बाजार में इस बार छोटे साइज में मेवा और मावे से भरी गुझिया तैयार कराई गई है। इसके साथ समोसा साइज में भी गुझिया बाजार में उतारी गई है। परंपरागत साइज से अलग इस गुझिया की मांग भी बन रही है। कारोबारी पंकज अग्रवाल बताते हैं कि लोगों की मंशा को देखते हुए छोटी और समोसा साइज में गुझिया पहली बार बाजार में आई है।