बरेली। पीएम मोदी के शिलान्यास वाली योजनाओं में भले अरिल नदी का जीर्णोद्घार भी शामिल हो, लेकिन करीब 30 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की फाइल अब तक शासन में लंबित है। प्रमुख अभियंता बाढ़ खंड से ही इसे स्वीकृति नहीं पाई है, जबकि आगे कई चरण में इसको मंजूरी मिलनी है। नदी के कायाकल्प के काम में लगातार देरी होने से चिंतित बाढ़ खंड के अधिकारियों ने फिलहाल मनरेगा से करीब एक करोड़ के बजट की डिमांड की है, ताकि मिट्टी की खुदाई का काम शुरू हो सके।
हाल में जिला प्रशासन ने मुख्य सचिव को जिले की पांच महत्वपूर्ण परियोजनाओं के नाम भेजे थे, जिनका शिलान्यास पीएम मोदी से कराया जा सकता है, इसमें अरिल नदी प्रोजेक्ट भी शामिल है। यह नदी सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के विधानसभा क्षेत्र आंवला के भी करीब चार दर्जन गांवों से होकर गुजरती है। अतिक्रमण की वजह से नदी के अस्तित्व खतरे में है। सिंचाई मंत्री के खास दिलचस्पी लेने पर इस नदी के कायाकल्प का फिर से बीड़ा उठाया गया है। बाढ़ खंड की टीम ने हाल ही में इस नदी का सर्वे किया, जिसमें नदी की जलधारा उद्गम स्थल से केवल 67 किलोमीटर तक ही मिली है। उसके आगे सिल्ट या खेती होने से अरिल का वजूद ही खत्म हो गया है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद बाढ़ खंड के अधिकारियों नेे विभागीय टीम के साथ बदायूं और बरेली की सीमा पर अहमदनगर और आंवला के गांव मऊचंदपुर सहित कई स्थानों पर पहुंचकर सर्वे किया है। करीब 30 करोड़ के कायाकल्प के लिए बरेली और बदायूं जिले के बाढ़ खंड के चार डिवीजन शामिल हैं। शासन से अब तक प्रोजेक्ट को मंजूरी न मिलने पर बाढ़ खंड के अधिकारियों ने बरेली के लिए 43 लाख और बदायूं के लिए 50 लाख रुपये का बजट मनरेगा से काम कराने के लिए मांगा है, ताकि नदी में मिट्टी खुदाई शुरू हो सके।
137 किलोमीटर नदी का हो चुका है जीपीएस सर्वे
बदायूं, बरेली और रामपुर जिलों की सीमा में नदी की जलधारा 137 किलोमीटर लंबी है। बरेली में 57 और बदायूं में 65 किमी का सफर तय करके नदी दातागंज के जमालपुर मधुकर नवादा में रामगंगा में मिलती है। नदी की वास्तविक किनारों की पैमाइश के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जीपीएस सर्वे कराया था। बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि उनके रिकार्ड के अनुसार नदी की चौड़ाई 18 से लेकर 40 मीटर तक है। जबकि जीपीएस सर्वे में कई जगह चौड़ाई चार मीटर तो कहीं उससे भी कम मिली है।
अरिल नदी का हाल में सर्वे किया है। करीब तीस करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। फिलहाल मनरेगा से करीब एक करोड़ रुपये का बजट मांगा गया है। नदी का कायाकल्प करने के लिए काम जल्द शुरू होना है। - कुंदन सिंह, एक्सईएन, बाढ़ खंड