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आईवीआरआई ओवरब्रिज- सीवीसी जांचेगी.. किसने किया घपला !

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बरेली। 11 करोड़ की लागत से ओवरब्रिज के काम में क्या गड़बड़ियां हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.. इसकी पड़ताल अब रेलवे की चीफ विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) करेगी। सूत्र बताते हैं कि विजिलेंस ने रेलवे के कुछ अधिकारी और कर्मचारियों के बयान लेने के साथ रिकार्ड भी ले लिए हैं। हाल ही में रेलवे के अधिकारियों ने पुल बनाने में गड़बड़ी और देरी करने पर ठेकेदार को टर्मिनेट कर दिया था। ठेकेदार हाईकोर्ट चला गया और रेलवे पर आरोप लगाए कि अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए ठीकरा उस पर फोड़ दिया है। कोर्ट में नौ जुलाई का पेश होने से पहले अब इस मामले की जांच तेजी से पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।
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ओवरब्रिज प्रोजेक्ट रेलवे के अधिकारियों की लापरवाही से पूरा नहीं हो पा रहा है। रेलवे ने क्रासिंग पर इस ओवरब्रिज के अपने हिस्से में आने वाले काम का ठेका वर्ष 2017 में एक आउट सोर्सिंग कंपनी को करीब 11 करोड़ में दिया था। बाद में निर्माण सामग्री में बढ़ोत्तरी होने का हवाला देते हुए इस प्रोजेक्ट की लागत 15.50 करोड़ रुपये कर दी गई। तीन माह पहले रेलवे ने ठेका लेने वाली एजेंसी के काम में गड़बड़ियां निकालते हुए उसे टर्मिनेट कर दिया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार को ओवरब्रिज के लिए आठ गार्डर बनाए, लेकिन न तो उनकी डिजाइन ठीक है और न ही उन्हेें मानक के अनुरूप बनाया गया है। ये गार्डर करीब सालभर से क्रासिंग के पास ही रखे हुए हैं। ओवरब्रिज के दूसरे काम भी सही नहीं हुए है। इधर, ठेकेदार यह कहते हुए हाईकोर्ट की शरण में चला गया है कि रेलवे के अफसरों की निगरानी में ही गार्डर बनाने का काम हुआ था। अफसरों ने ही डिजाइन सही से तैयार नहीं किया था। खुद पर कार्रवाई से बचने के लिए ठेकेदार की गर्दन को फंसा दिया गया है। हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद रेलवे की सीवीसी ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। छानबीन की जा रही है कि इस ओवरब्रिज बनाने में किसके स्तर से गड़बड़ी और लापरवाही हुई है।

अधूरा काम पूरा कराने के लिए 24 को होगा 3.50 करोड़ का टेंडर
इस पुल का काम सेतु निगम करीब छह माह पहले ही पूरा कर चुका है। रेलवे के प्रोजेक्ट शुरू न कर पाने से इस पुल का उद्घाटन डेढ़ साल बाद भी नहीं हो सका है। अधूरे काम के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ का टेंडर रेलवे 24 जून को कराएगा। इन दिनों रेलवे अंडरपास का काम करा रहा है।
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