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बुखार से भमोरा में दो बच्चों की मौत

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 जिले भर में करीब सवा दो सौ लोगों की जान लेने के बाद भी मलेरिया का प्रकोप थमने में नहीं आ रहा है। जिले भर में 24 घंटे के अंदर साढ़े तीन सौ से ज्यादा मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई है। शहर के बारादरी और सीबीगंज इलाके में मलेरिया के कई मरीज मिले हैं। जानलेवा फैल्सीपेरम और वाई वैक्स मलेरिया के लगातार केस मिलने से हालात संवेदनशील बने हुए हैं। इसके अलावा डेंगू और टाइफाइड के भी मरीज लगातार सामने आ रहे हैं। शनिवार देर रात भमोरा इलाकों में बुखार से दो बच्चों की मौत भी हो गई।
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रविवार को सीबीगंज के चंद्रपुर जोगीयान की शबीजहां और ग्रीन सिटी के तस्लीम में मलेरिया की पुष्टि हुई। बारादरी में रहने वाले पंकज मिश्रा को भी मलेरिया होने के बाद मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में लगे मेडिकल कैंपों में 24 घंटे के अंदर 350 से ज्यादा मरीज मलेरिया के पहुंचे हैं। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ला ने बताया कि बुखार के कुल 1986 मरीज मेडिकल कैंपों में पहुंचे थे। इनमें 145 मरीजों की स्लाइड बनाई गई जबकि 1841 की आरडीटी किट से जांच की गई। गांवों में 2311 क्लोरीन टेबलेट बांटी गई। मलेरिया विभाग लगातार गांवों में एंटी लार्वा का छिड़काव कर रहा है। जानलेवा फैल्सीपेरम और वाई वैक्स मलेरिया के भी लगातार केस मिल रहे हैं।
भमोरा। शनिवार देर रात बुखार से दो मासूमों की मौत हो गई। गांव सिरोही के पप्पू की छह वर्षीय बेटी प्रियंका को शनिवार को अचानक बुखार चढ़ने के बाद परिजन एक झोलाछाप डॉक्टर के पास ले गए थे। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते ही उनकी बेटी की हालत बिगड़ने लगी। फिर उसकी मौत हो गई। दूसरा मामला बेहटा लालच गांव के नवल किशोर की 11 वर्षीय बेटी स्वाति की मौत का है। कई दिनों से उसे बुखार आ रहा था। जिसका इलाज सीएचसी भमोरा में चल रहा था। शनिवार देर शाम हालत बिगड़ने पर परिजन स्वाति सीएचसी ले जा रहे थे, रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
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छुट्टी के दिन ओपीडी खोलने का ड्रामा
बरेली। बुखार से लगातार मौत होने के बाद डीएम ने निर्देश जारी किए थे कि अगले आदेश तक डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त रहेंगी और सरकारी अस्पतालों को अवकाश के दिनों में भी खोला जाएगा। इस आदेश पर रविवार को जिला अस्पताल की ओपीडी तो 12 बजे तक खुली, लेकिन ओपीडी में डॉक्टर कुछ ही देर बैठकर उठ गए। मरीज दोबारा उनके बैठने का इंतजार करते रहे और आखिर में निराश होकर लौट गए। देहात के सरकारी अस्पतालों का इससे भी बुरा हाल रहा। महिला अस्पताल की ओपीडी भी ज्यादा देर नहीं खुली।
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