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ये कुत्ते है या दूसरे जंगली जानवर
सीतापुर से लौटने के बाद मंथन में जुटे आईवीआरआई के वैज्ञानिक
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
मासूमों पर झुंड में हमला करने वाले कुत्तों का जैसा हुलिया और बर्ताव बताया जा रहा है, उससे लगता है कि ये आम कुत्तों जैसे नहीं हैं। ये न तो कुत्तों की तरह भौंक रहे हैं, न ही किसी को सामने देखकर गुर्राते हैं। बस, अचानक आकर हमला कर देते हैं और दांतों से मांस नोचने लगते हैं।
आईवीआरआई वैज्ञानिकों की टीम खैराबाद से लौटने के बाद इस पर मंथन में जुटी है कि आखिर कुत्ते जैसे ये जानवर कौन हैं। सीतापुर के खैराबाद के गांव रहीमपुर, कुलिया, बद्रीखेड़ा, गुरपलिया समेत कई गांवों में कुत्ते जैसे दिखने वाले जानवर झुंड में आकर बच्चों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार रहे हैं। छह माह में इन गांवों में दर्जनों बच्चों की मौत हो चुकी है और कई घायल हो चुके हैं। आईवीआरआई वैज्ञानिकों की टीम ने डॉ. दिनेश चंद्रा के नेतृत्व में कुत्ते जैसे जानवरों के स्वभाव का अध्ययन करने के लिए खैराबाद के इन गांवों का भ्रमण किया। अब टीम खैराबाद से बरेली वापस आ गई है और इन जानवरों के अचानक हमलावर होने के स्वभाव का मंथन कर रही है।
एक ग्रामीण ने वैज्ञानिकों को बताया था कि जब वह खेत में काम कर रहा था, तभी अचानक कुत्तों का झुंड आ गया। न वह भौंके, न ही गुर्राए। बस जमीन सूंघकर सीधे हमलावर हो गए। ग्रामीण पेड़ पर चढ़ गया, तब जाकर उसकी जान बची। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुत्ते हाथ या पैर में काटते हैं, लेकिन कुत्ते जैसे दिखने वाले इन जानवरों ने ज्यादातर गले पर हमला किया है। ये जानवर झुंड में आते हैं, फिर हमला करने के बाद एक ही दिशा में भाग जाते हैं, जबकि सामान्य तौर पर शहर या गांव में पाए जाने वाले कुत्तों की यह आदत नहीं होती। प्रशासन ने वहां 100 से ज्यादा कुत्ते मार दिए हैं लेकिन उनका पोस्टमार्टम नहीं कराया गया।