बरेली। सोमवार को अभिभावकों चिंता और बढ़ाते हुए नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया। योगी सरकार के फीस अध्यादेश को ताक पर रखते हुए ज्यादातर स्कूलों ने न सिर्फ फीस बढ़ाई है बल्कि किताबों की कीमत में भी कोई राहत नहीं दी है। पिछले साल भी इस मुद्दे पर काफी जद्दोजहद हुई थी लेकिन नतीजा जीरो रहा। इस बार हालात और खराब हैं, लेकिन पिछले साल के घटनाक्रम से सबक ले चुके अभिभावक कुछ ज्यादा बोलने तक को तैयार नहीं हैं। उनकी चुप्पी उनके इस डर की ओर इशारा कर रही है कि उनका विरोध कहीं उनके बच्चों के भविष्य पर भारी न पड़ जाए। फीस और किताबों की टेंशन जरूर उनका पसीना छुड़ा रही है।
पिछले साल स्कूलों की फीस और महंगी किताबों पर काफी घमासान मचा था। पेरेंट्स एसोसिएशन के साथ तमाम संगठन निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। जिला प्रशासन से लेकर शिक्षा विभाग के अफसरों तक को घेरा गया। सूबे के दूसरे हिस्सों से भी स्कूलों की मनमानी की शिकायतें पहुंचीं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका संज्ञान लिया। उसके बाद फीस अध्यादेश जारी हुआ। इसके बाद प्रशासनिक सिस्टम में पूरे साल बयानबाजी और बैठकों का दौर चलता रहा लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं निकला। नया सत्र शुरू हुआ तो हालात पिछले साल से भी ज्यादा खराब नजर आ रहे हैं। स्कूलों ने फीस के साथ किताबों की कीमतें भी बढ़ा दी हैं।
कहते हैं किताबें कहीं से भी लो पर एक
दुकान के अलावा मिलतीं कहीं नहीं
किताबों की दुकानों पर अभिभावकों की भीड़ लगी है। हर बार की तरह ज्यादातर स्कूलों ने अपने कोर्स अच्छा-खासा रद्दोबदल भी किया है। इसमें कई वर्क बुक भी शामिल हैं। किताबों का खर्च पूरा करने के लिए अभिभावकों को दूसरे खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। अधिकांश स्कूलों ने रिजल्ट के साथ ही कोर्स का पर्चा थमा दिया है। किताबों पर स्कूलों का मोटा कमीशन बंधा है, लिहाजा उनका कोर्स बंधी हुई दुकानों पर ही उपलब्ध है। अभिभावकों से यह जरूर कह दिया जाता है कि वे कहीं से भी किताबें लेने के लिए स्वतंत्र हैं। फीस में कितनी बढ़ोत्तरी होगी, यह भी नहीं बताया। अगर फीस ज्यादा बढ़ जाए और वे बच्चे को दूसरे स्कूल में ले जाना चाहें तो कोर्स लेने की वजह से ऐसा भी नहीं कर सकेंगे। सोमवार को विभिन्न बुक स्टॉल पर बच्चों को किताबें दिलाने आए अभिभावकों से बातचीत में यह बातें सामने आई।
स्कूलों के डर से खामोशी
बच्चों की पढ़ाई पर हावी महंगाई से सभी परेशान हैं लेकिन खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं। उनके मन में डर है कि अगर वे विरोध करेंगे तो स्कूल प्रबंधन उसका बदला बच्चे के भविष्य से लेगा। कहने लगे, प्रशासन ने तमाम बैठकें कर स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं, वे लोग देखें कि हकीकत में कितने प्रतिशत लागू हुए हैं। जो हकीकत सामने आए, उसके आधार पर अधिकारी एक्शन लें। मगर सरकारी सिस्टम है कि खामोश बैठा है।
प्रमुख स्कूलों के कोर्स की कीमत
नर्सरी-केजी : 2-3 हजार
एक-दो : 3-5 हजार
तीन-पांच : 4-6 हजार
छह-आठ : 6-8 हजार
(नोट : हर कक्षा में औसतन एक से डेढ़ हजार तक की बढ़ोत्तरी हुई है)
प्रमुख स्कूलों की फीस
नर्सरी-केजी : 15-20 हजार
एक-पांच : 20-40 हजार
छह-आठ : 25-50 हजार
(नोट : नया एडमिशन कराने पर 10-15 हजार रुपये तक अतिरिक्त लिए जाते हैं)
‘जहां तक मेरी जानकारी में है बरेली में स्कूलों ने सात से आठ प्रतिशत तक फीस बढ़ाई है। अगर किसी स्कूल ने ज्यादा फीस बढ़ाई है तो जानकारी मिलने पर उसके प्रबंधन से बात की जाएगी।’ - पारुष अरोड़ा, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन
‘स्कूल प्रबंधन मनमानी पर आमादा हैं। न तो स्कूलों में फीस कम हुई और न ही किताबों की दरें। पिछले साल के मुकाबले इनमें बढ़ोत्तरी जरूर कर दी गई है। पैरे्ट्स एसोसिएशन इसको लेकर आंदोलन करेगी।’ - अंकुर सक्सेना, पैरेंट्स एसोसिएशन