सोमवार को शहामतगंज से लेकर नकटिया नरियावल तक सड़क के किनारे सौ से ज्यादा भारी वाहन खड़े मिले। ट्रांसपोर्ट नगर में फिलहाल दो सौ वाहन नहीं रह गए हैं। 24 घंटे में शहर के अंदर रोजाना औसतन एक हजार वाहन प्रवेश कर सड़क के किनारे खड़े होकर जाम की वजह बनते हैं।
सोमवार 12 बजे के करीब शहामतगंज से सूफी टोला तक तो कोई ट्रक या डीसीएम खड़ा नहीं मिला लेकिन इससे आगे ईसाईयों की पुलिया के किनारे छह ट्रक और दो टैंकर खड़े थे। सेटेलाइट से पहले तीन पेट्रोल पंपों पर 30 से ज्यादा ट्रक और टैंकर खड़े मिले। सेटेलाइट चौराहे पर दो ट्रकों ने जाम लगा रखा था। जाट रेजीमेंट की मेस के आगे सड़क के किनारे चार ट्रक खड़े दिखे। मजार और नकटिया पुल के बीच आधा दर्जन से ज्यादा ट्रक सड़क के किनारे खड़े मिले। नकटिया चौकी से बिथरी चौराहे पर सड़क के दोनों ओर ट्रकों की लाइन लगी थी। नरियावल में भी यही हाल था। ट्रांसपोर्ट नगर से शहर की ओर निकलते हुए पांच ट्रक दिखे जबकि प्रशासन ने लखनऊ की ओर से आने वाले प्रत्येक ट्रक को ट्रांसपोर्ट नगर में ही रोकने की सख्त हिदायत दे रखी है। ट्रांसपोर्ट नगर गेट पर पहले पुलिस चौकी के कांस्टेबिल या होमगार्ड खड़े होते थे। अब टीपी नगर के दोनों मुख्य गेट पर कोई भी पुलिस कर्मी खड़ा नहीं होता। ट्रक ड्राइवर बेखौफ होकर शहर के अंदर अपने वाहनों की एंट्री करा रहे हैं।
आधी रात से लगती है लाइन
सेटेलाइट से शहामतगंज, और पीलीभीत बाईपास के अलावा कालीबाड़ी, मिर्ची वाली गली, साहू रामस्वरूप डिग्री कालेज से लेकर कुतुबखाना मंडी तक ट्रकों की रोजाना आधी रात से सुबह तक लाइन लगी रहती है। इसके अलावा मॉडल टाउन रोड, ईंट पजाया चौराहा, मूर्ति नर्सिंग होम से प्रेम नगर धर्मकांटा तक सड़क के किनारे रोजाना रात में ट्रक खड़े होते हैं।
पेट्रोल पंप हैं वजह
ट्रक, डीसीएम या अन्य भारी वाहनों के शहर के अंदर प्रवेश की मूल वजह पेट्रोल पंप हैं। अधिकांश पेट्रोल पंप मालिक अपने पंपों पर रात भर ट्रक बिना किसी वजह के खड़ा कराते हैं।
बीडीए ने ट्रांसपोर्ट नगर में काम नही कराया। ट्रांसपोर्टर्स वहां जाने को तैयार हैं लेकिन प्रशासन और बीडीए की ओर से ही ढिलाई हो रही है। हम हर स्तर पर सहयोग करेंगे। रामकृष्ण शुक्ला, अध्यक्ष ट्रांसपोर्ट रेता बजरी यूनियन
ट्रांसपोर्टर्स को प्लाट दे दिए गए हैं। किसी ट्रांसपोर्टर्स के प्लाट पर कब्जा है तो वह बीडीए को लिखकर दे। उसे फौरन हटवाया जाएगा। ट्रांसपोर्टरों को भेजने का काम प्रशासन का है। मैकेनिकों को सस्ती दरों पर प्लाट देने का ट्रांसपोर्ट बसने से कोई संबंध नहीं है। बोर्ड में प्रस्ताव स्वीकृत होते प्लाट आवंटित कर देंगे लेकिन तब तक शहर के समस्त ट्रांसपोर्टर वहां पहुंचकर अपना काम शुरू करें। --डा. सुरेंद्र कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष बीडीए