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नेताजी प्रत्याशी नहीं बने तो क्या.. चुनाव का मीटर तो घूम रहा है

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बरेली। अगर नेताजी इस मुगालते में हैं कि पार्टी के प्रत्याशित घोषित करने और नामांकन कराने से पहले जनसभा, रैली और जुलूसों पर वे जो पैसा फूंक रहे हैं, उसका चुनाव आयोग कोई संज्ञान नहीं लेगा तो उनकी यह गलतफहमी जल्द ही दूर हो जाएगी। चुनाव आयोग के निर्देश पर बनी लेखा और वीडियो ऑडिटर टीमें जिले में चल रही चुनावी गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। आचार संहिता लागू होने के बाद हुई ऐसी सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा रहा है। फिलहाल यह पूरा खर्च पार्टी के खाते में जोड़ा जाएगा और नामांकन फाइल होने के बाद इसे प्रत्याशी के चुनाव खर्च में शामिल कर दिया जाएगा।
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निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों के खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रुपये निर्धारित की है। कोई भी उम्मीदवार इससे ज्यादा खर्च न कर सके, इसके लिए निगरानी टीमें गठित की गई है। चुनाव व्यय की निगरानी करने वाले अधिकारियों का कहना है कि उम्मीदवारों के चुनाव खर्च का हिसाब रखने के लिए बैंक खाता तो उनका नामांकन दाखिल होने के बाद खुलेगा लेकिन उनके चुनाव खर्च की निगरानी अभी से शुरू कर दी गई है। सभी पार्टियों के साथ फिलहाल निर्दलीय तौर पर चुनाव प्रचार के कार्यक्रमों और जनसभाओं पर किए जा रहे खर्च का लगातार ब्योरा तैयार हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्याशियों के खर्च का रिकार्ड बनाने के लिए गाइड लाइन पहले ही जारी हो चुकी है। लेखा टीमें और वीडियो ऑडिटर की रिपोर्ट के आधार पर इन सबका चुनाव का मीटर घूम रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्याशी का नामांकन पत्र जांच में पास होने के साथ उनके खर्च उनके अपने चुनावी व्यय खाते में शामिल होने लगेंगे। 10 मार्च को आचार संहिता लागू होने के बाद हुए सभी चुनावी कार्यक्रमों के खर्च का आंकलन कर उन्हें पार्टी व्यय में सम्मिलित किया गया है।
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घपला किया तो मिलेगा नोटिस
चुनाव आयोग की टीम और प्रत्याशी दोनों को ही गाइड लाइन के हिसाब से अपने चुनाव खर्च का रिकार्ड रखना होगा। समय-समय पर व्यय प्रेक्षक इसकी चेकिंग भी करेंगे। अगर किसी प्रत्याशी ने अपने खर्च को कम करने के लिए घपला किया तो आयोग अपनी टीम के रिकार्ड से उनका मिलान कराएगी। इसके बाद प्रत्याशी को खर्च छिपाने के मामले में नोटिस भी दिया जा सकता है।

प्रत्याशियों के चुनाव खर्च पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। प्रत्याशी का नामांकन फाइनल होने के साथ ही चुनाव संबंधित खर्च उसने खाते में शामिल होने लगेंगे। अभी इसे पार्टी के खाते में शामिल किया जा रहा है। - अनवर अहमद, मुख्य कोषाधिकारी/ चुनावी व्यय प्रभारी
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