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महिलाओं को सम्मान एवं अधिकार नहीं

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बरेली। आर्य समाज बिहारीपुर में वार्षिकोत्सव एवं ऋषि बोधोत्सव मनाया जा रहा है। इसमें भजन और गीत के अलावा व्याख्यान भी हुए जिसमें धर्मशास्त्रों को लेकर भी चर्चा हुई।
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इस मौके पर वक्ता डा. सुरेंद्र कुमार ने हिंदू समुदाय के धर्मशास्त्र एवं आदि वैदिक संविधान को मनुस्मृति मानते हुए अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने ‘मनुस्मृति पर आक्षेप एवं उनका निराकरण’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि धर्मिक संविधान में महिलाओं को सम्मान एवं अधिकार नहीं दिए गए हैं। इसी तरह ‘जाति व्यवस्था’ जिससे समाज में ऊंच नीच की भावना पनपी, वहीं दलित/शूद्रों के प्रति छुआ छूत, ऊंच नीच एवं असम्मान का विधान है, जिसके उन्होंने निराकरण भी बताए।
इससे पूर्व प्रात: कालीन सत्र में डॉ. सुरेंद्र ने ‘मृत्यु’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की आयु या मृत्यु की तिथि निश्चित नहीं है किंतु ब्रह्मचर्य, आचार विचार, साधना से आयु बढ़ाई जा सकती है और मृत्यु को टाला जा सकता है। पूर्व के सत्र में प्रभा आर्या एवं भानु प्रकाश आर्य ने महर्षि दयानंद के योगदान पर भजन और गीत प्रस्तुत किए। इसके अलावा स्वामी ब्रह्मानंद वेद भिक्षु के प्रवचन एवं भानु प्रकाश आर्य के भजन भी प्रस्तुत किए गए। आर्य समाज के मंत्री ने बताया कि बृहस्पतिवार को भी दो सत्र होंगे। सायं काल सत्र में राष्ट्र रक्षा गीत होगा।
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